क्रोनिक लिम्फोसाईटिक ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर) – जोखिम तत्व, लक्षण, स्टेजिंग, इलाज | Chronic Lymphocytic Leukemia – Risk Factors, Symptoms, Staging, Treatment in Hindi

Table of Contents

संक्षिप्त विवरण | Overview in Hindi

क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (Chronic Lymphocytic Leukemia) अमेरिका और पश्चिमी क्षेत्र में सबसे आम ल्यूकेमिया है जिसमें  सभी ल्यूकेमिया मामलों के लगभग एक-चौथाई मामले शामिल हैं। पिछले दशक के दौरान क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के मामले और मृत्यु दर में थोड़ी गिरावट आई है।

क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के होने की घटनाएं आमतौर पर 65 से 74 वर्ष की उम्र के लोगों में ज़्यादा देखी गयी है।  क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) की घटना दर महिलाओं की तुलना में पुरुषों में ज़्यादा होती है।

खून एक संयोजी ऊतक है जिसमें तरल बाह्य मैट्रिक्स/extracellular matrix (प्लाज्मा) और रुके हुए गठित तत्व (रक्त सेल और सेल के टुकड़े) शामिल हैं। गठित तत्वों के 3 मुख्य घटकों में लाल रक्त कोशिका (RBC), सफेद रक्त कोशिका (WBC) और प्लेटलेट्स शामिल हैं।

WBC को माइक्रोस्कोप से (विभिन्न रंगों को लगाकर) उनकी उपस्थिति के आधार पर विभिन्न उपप्रकारों में बाँटा गया है: न्यूट्रोफिल(neutrophils), बेसोफिल(basophils), ईोसिनोफिल(eosinophils), मोनोसाइट्स(monocytes), और लिम्फोसाइट्स(lymphocytes) (टी-सेल, बी-सेल और मारने वाली प्राकृतिक सेल)। प्रत्येक प्रकार के रक्त सेल का एक अलग काम होता है और हेमोपोइजिस (hemopoiesis) नाम की प्रक्रिया से लाल अस्थि मज्जा में प्लुरिपोटेंट स्टेम सेल से उत्पन्न होता है।

क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) एक विकार है जिसमें बी लिम्फोसाइट्स (क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) में ल्यूकेमिया के सेल परिपक्व बी-लिम्फोसाइट्स जैसे दिखते हैं) बिना नियंत्रण के अलग होने लगते हैं। असामान्य बी लिम्फोसाइट्स धीरे-धीरे लाल अस्थि मज्जा और पेरीफेरल खून में फंस जाते हैं जिससे सामान्य RBCs, WBCs, और प्लेटलेट्स की संख्या कम हो जाती है।

क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) सेल विभिन्न अंगों में फैल सकता है जैसे यकृत, प्लीहा और लिम्फ नोड्स। पैथोलॉजिकल रूप से, क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) को खून में >/=5 x 10^9/L घातक मोनोक्लोनल बी सेल की उपस्थिति के रूप में परिभाषित किया गया है। क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) सेल बी-सेल मार्कर CD19, CD20, CD21, CD23 को दर्शाते हैं; और टी-सेल मार्कर CD5।

क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) का विशेषक निदान | Differential Diagnosis of CLL in Hindi

क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) का विशेषक निदान | Differential Diagnosis of CLL in Hindi

स्माल लिम्फोसाईटिक लिंफोमा (Small lymphocytic lymphoma/SLL)

यह क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) से संबंधित विकार है, जिसकी पहचान लिम्फोइड टिश्यू (लिम्फ नोड्स और प्लीहा) और अस्थि मज्जा में घातक मोनोक्लोनल बी-सेल की उपस्थिति से होती है, लेकिन <5 x 10^9/L घातक सेल खून में मौजूद होते हैं (क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के विरोध के रूप में)।

मोनोक्लोनल बी-सेल लिंफोसाइटोसिस (Monoclonal B-cell lymphocytosis/MBL)

यह क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) से आगे की स्थिति है, जिसकी पहचान खून में <5 x 10^9/L असामान्य मोनोक्लोनल बी सेल की उपस्थिति से होती है, लेकिन लसदार लिम्फ नोड ना होने पर, या लोपोप्रोलिफ़ेरेटिव विकार के अन्य नैदानिक स्थितियों के ना होने पर। हर साल, लगभग 1% से 2% रोगी मोनोक्लोनल बी-सेल लिंफोसाइटोसिस (MBL) से क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) तक पहुँचते हैं।

प्रोलोमोसाइटिक ल्यूकेमिया (Prolymphocytic leukemia/PLL)

यह लिम्फोसाईटिक ल्यूकेमिया का आक्रामक प्रकार है, जिसकी पहचान असामान्य तरीके से उच्च संख्या में प्रोलिम्फोसाइट्स, स्प्लेनोमेगाली और लिम्फ नोड्स की न्यूनतम भागीदारी की उपस्थिति से होती है। यह बी-सेल या टी-सेल प्रकार हो सकता है। यह क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) की तुलना में तेजी से बढ़ता और फैलता है।

बड़े दानेदार लिम्फोसाइट्स ल्यूकेमिया (Large granular lymphocyte (LGL) leukemia)

यह दुर्लभ टी-सेल या प्राकृतिक मारनेवाला(NK)-सेल लिम्फोप्रोलिफेरेटिव विकार है, जिसकी पहचान खून में सामान्य लिम्फोसाइटों की तुलना में असामान्य रूप से बड़ी संख्या की उपस्थिति, साइटोपेनिया (न्यूट्रोपेनिया, एनीमिया, और थ्रोम्बोसाइटोपेनिया), और सीरोलॉजिकल असामान्यताएं (रुमेटीड फैक्टर, एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी, हाइपरगामेग्लोबुलिनमिया और उच्च बीटा 2 – माइक्रोग्लोब्युलिन) से होती है। बड़े दानेदार लिम्फोसाइट्स (LGL) ल्यूकेमिया सेल में टी-सेल या प्राकृतिक मारनेवाले(NK)-सेल की विशेषताएं हो सकती हैं, प्राकृतिक मारनेवाले(NK)-सेल के साथ फेनोटाइप अधिक आक्रामक हो जाता है।

रोयेंदार सेल ल्यूकेमिया (Hairy cell leukemia/HCL)

यह दुर्लभ क्रॉनिक बी-सेल लिम्फोप्रोलिफेरेटिव विकार है, जिसकी पहचान रोयेंदार सेल की असामान्य रूप से बड़ी संख्या (सामान्य लिम्फोसाइटों से दोगुने बड़े, माइक्रोस्कोप से देखे जाने पर जिनमें अनियमित साइटोप्लास्मिक होते हैं), साइटोपेनिया और स्प्लेनोमेगाली से होती है। हाल ही में यह पाया गया है कि रोयेंदार सेल ल्यूकेमिया (HCL) के रोगियों में BRAF (V600E) जीन में म्यूटेशन होता है। रोयेंदार सेल ल्यूकेमिया (HCL) धीरे-धीरे बढ़ता है और आधुनिक चिकित्सीय एजेंटों से इलाज करने पर अच्छा परिणाम मिल सकता है। रोयेंदार सेल ल्यूकेमिया (HCL) सभी बड़े ल्यूकेमिया के लगभग 2% में पाया जाता है।

क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया के जोखिम तत्व | Risk Factors for CLL in Hindi

क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया के जोखिम तत्व | Risk Factors for CLL in Hindi

कई महामारी विज्ञान (epidemiological) के अध्ययनों ने क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) से जुड़े कई ख़तरों को उजागर किया है। ख़तरों की सूची निम्नलिखित है:

औद्योगिक / व्यावसायिक / दुर्घटना  का खतरा (Industrial/Occupational/Accidental exposure)

कार्सिनोजेन्स से सीधा संपर्क जैसे एजेंट ऑरेंज (वियतनाम युद्ध के दौरान उपयोग किया जाने वाला एक शाकनाशी); अन्य कीटनाशक, बेंजीन (benzene) और पेट्रोलियम (petroleum) उत्पादों के संपर्क से  क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) का ख़तरा बढ़ जाता है।

पारिवारिक इतिहास (Family History)

करीबी रिश्तेदारों में क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) होने के इतिहास वाले व्यक्ति को क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) होने का खतरा ज़्यादा माना जाता है।

उम्र (Age)

क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) वृद्ध लोगों और पुरुषों में अधिक आम है और 20 वर्ष से कम उम्र वाले व्यक्तियों में यह बहुत कम है। इसीलिए, क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) को वृद्ध विशेष रोग माना जाता है।

लिंग (Gender)

क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक आम है (2:1)।

जातीयता (Ethnicity)

एशियाई लोगों की तुलना में कोकेशियन में क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) की घटना अधिक आम है।

क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया के संकेत और लक्षण | Signs and Symptoms of CLL in Hindi

क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया के संकेत और लक्षण | Signs and Symptoms of CLL in Hindi

क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के कुछ सामान्य संकेत और लक्षण निम्नलिखित हैं:

 

  • बिना वजह के वजन घटना।
  • भूख मर जाना।
  • बुखार आना और रात को पसीना आना।
  • एनीमिया के कारण थकान और कमजोरी, एनीमिया से संबंधित अन्य लक्षणों में सांस की तकलीफ और चक्कर शामिल हो सकते हैं।
  • अपचायक WBC गिनती के कारण संक्रमण (जैसे निमोनिया) का बार-बार होना।
  • कम प्लेटलेट काउंट (थ्रोम्बोसाइटोपेनिया/thrombocytopenia) के कारण रक्तस्राव की प्रवृत्ति में वृद्धि, चोट लग्न, बार बार और गंभीर तरह से नाक से खून बहना, और मसूड़ों से खून निकलना।
  • लिम्फ नोड्स में सूजन आना।
  • प्लीहा और/या जिगर का बढ़ना।

इजाल और स्टेजिंग के लिए क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया की जांच | CLL Investigations for Diagnosis and Staging in Hindi

इजाल और स्टेजिंग के लिए क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया की जांच | CLL Investigations for Diagnosis and Staging in Hindi

अगर संकेतों और लक्षणों के कारण ऐसा लगता है कि व्यक्ति को  क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) है, तो रोग के इलाज की पुष्टि करने के लिए कुछ जांच आवश्यक है। इसके अलावा, इससे बीमारी की स्टेज जानने में मदद होगी, जिससे उपयुक्त इलाज विकल्प चुनने में मदद मिलेगी।

क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के लिए कुछ आम तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले नैदानिक उपकरण निम्नलिखित हैं:

खून की जांच (Blood Tests)

खून की जांच (Blood Tests)

खून की जांच बहुत ज़रूरी जानकारी देती है जो कि क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के इलाज को दिशा प्रदान करती है। क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के इलाज के लिए आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वालीं खून की जांच निम्नलिखित हैं:

कम्पलीट ब्लड सेल्स काउंट (Complete Blood Cells Count/CBC)

यह परीक्षण RBCs, WBCs, और प्लेटलेट्स के स्तर की जानकारी देता है। क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के ज़्यादातार मामलों में, छोटे स्तर के RBCs और प्लेटलेट्स और बड़े स्तर के WBCs होते हैं। बड़े स्तर के WBCs को निगरानी में रखा जाता है क्योंकि इसमें मोनोक्लोनल बी-लिम्फोसाइटों की उपस्थिति होती है जो WBCs की तरह दिखते हैं लेकिन WBCs का काम नहीं कर सकते।

 

ब्लड स्मीयर (Blood Smear)

इस जांच में, रक्त के नमूने की एक बूंद को एक ग्लास स्लाइड पर फैलाया जाता है और इसकी जांच माइक्रोस्कोप से की जाती है। यह जांच विभिन्न खून के सेल के वितरण या उपस्थिति में परिवर्तन का पता लगाने में मदद करती है। टूटे  लिम्फोसाइट्स या “स्मज” सेल आमतौर पर क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के मामले में दिखाई देते हैं, जो क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) सेल की नाजुकता को दर्शाते हैं।

 

फ्लो साइटोमेट्री (Flow cytometry)

इस तकनीक में, खून के नमूने को पहले कुछ फ्लोरोसेंट एंटीबॉडी के साथ जांचा जाता है जो सेल की सतह पर मौजूद कुछ विशिष्ट प्रोटीन (एंटीजन) से जुड़ जाते हैं। जांचे गए नमूने का फिर लेजर बीम और एक कंप्यूटर से जुड़े डिटेक्टर से विश्लेषण किया जाता है।

यह जांच हर प्रकार के सेल के परिमाण के साथ-साथ खून के नमूने में विभिन्न प्रकार के सेल (सतह प्रोटीन के साथ विशिष्ट सेल) का पता लगाकर क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के की पहचान कर सकती है। CD19, CD20, CD5, CD23 और CD10 सेल सतह प्रोटीन की उपस्थिति आमतौर पर क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) में इस तकनीक द्वारा पाई जाती है। सेल सतह झिल्ली पर या तो कप्पा (kappa) या लैम्ब्डा इम्युनोग्लोबुलिन (lambda immunoglobulin) प्रकाश श्रृंखला की प्रतिबंधित अभिव्यक्ति बी-सेल के क्लोनलिटी को दर्शाती है।

 

फ्लोरोसेंट इन सीटू हाइबरडाईज़ेशन (Fluorescent in situ hybridization/FISH)

इस तकनीक में, फ्लोरोसेंट RNA जांच का इस्तेमाल होता है जो नमूना सेल में क्रोमोसाम (chromosomes) के एक विशिष्ट हिस्से को जोड़ता है। फिर, नमूने की माइक्रोस्कोप से जांच की जा सकती है, ताकि कुछ क्रोमोसाम (chromosomes) असामान्यताएं समझी जा सकें जैसे जगह बदलना, बढ़ना या कम होना।

यह तकनीक बहुत संवेदनशील, तेज और सटीक है। इसीलिए, इस तकनीक को क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) सेल में सामान्य आनुवंशिक असामान्यताओं का पता लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, उदाहरण के लिए, डेल(13q), डेल(11q), डेल(17p), ट्राइसॉमी 12 और TP53 जीन में म्यूटेशन।

 

पॉलीमरेज़ चेन रिएक्शन (Polymerase chain reaction/PCR)

यह एक बहुत ही संवेदनशील डायग्नोस्टिक टूल है जो विशिष्ट आनुवंशिक परिवर्तन के सहारे बहुत कम संख्या में मौजूद ल्यूकेमिया सेल का भी पता लगा सकता है, उदाहरण के लिए, इम्युनोग्लोबुलिन भारी-चेन वैरिएबल (IGHV) क्षेत्र का जीन म्यूटेशन।

इस तकनीक का उपयोग आम तौर पर इलाज के बाद रोगियों में शेष बचे रोग (MRD) के निदान के लिए किया जाता है।

अस्थि मज्जा एस्पिरेशन/बायोप्सी (Bone Marrow Aspiration/ Biopsy)

अस्थि मज्जा एस्पिरेशन/बायोप्सी (Bone Marrow Aspiration/Biopsy)

क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के लिए कुछ रोगनिरोधी कारकों से संबंधित जानकारी हासिल करने के लिए अस्थि मज्जा बायोप्सी नमूने (जो बहुत ज़्यादा ज़रूरी नहीं हैं) भी लिए और जांचे जा सकते हैं।

बायोप्सी के नमूने की फिर प्रयोगशाला में जांच की जाती है और क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) सेल के बारे में बहुत उपयोगी जानकारी दे सकती है जैसे कि क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के फैलने का पैटर्न (गांठदार बनाम बीचवाला पैटर्न) या कैंसर के परिवर्तनों की गंभीरता, और विशिष्ट दोषपूर्ण जीन या प्रोटीन की उपस्थिति।

 

इम्यूनोहिस्टोकेमिस्ट्री (Immunohistochemistry)

इस तकनीक में, बायोप्सी नमूने का बहुत पतला हिस्सा पहले एक माइक्रोस्कोप ग्लास स्लाइड से जोड़ा जाता है। फिर नमूने को विशिष्ट एंटीबॉडी के साथ मिलाया जाता है जो कुछ अलग तरह के कैंसर सेल के लिए विशिष्ट प्रोटीन से जुड़ा होता है। फिर कुछ अभिकर्मकों को जांच किये हुए नमूनों में जोड़ा जाता है जिससे बाध्य एंटीबॉडी को का रंग बदल जाता है।

एंटीबॉडी-प्रोटीन कॉम्प्लेक्स के रंग बदलाव को माइक्रोस्कोप से देखा जा सकता है, जो कैंसर सेल का प्रकार बताता है। CD38, CD49d, और ZAP-70 होने का निर्धारण इस तकनीक (या फ्लो साइटोमेट्री) से किया जा सकता है, जो कि रोगनिदान संबंधी जानकारी देता है और सही इलाज चुनाव करवाता है।

इमेजिंग जांच (Imaging Tests)

इमेजिंग जांचों की उपयोगिता क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया का पता लगाने तक सीमित है। हालांकि, इन जांचों से क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) की शरीर के विभिन्न अंगों में मौजूदगी का पता लगाया जा सकता है। वैकल्पिक रूप से, इन जांचों को संक्रमण जैसी समस्याओं के साथ मूल्यांकन करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

कंप्यूटेड टोमोग्राफी स्कैन (Computed tomography (CT) scan)

कंप्यूटेड टोमोग्राफी स्कैन (Computed tomography (CT) scan)

इस तकनीक में, एक्स-रे का इस्तेमाल करके शरीर के अंगों के विस्तृत क्रॉस-सेक्शनल चित्र लिए जाते हैं। इसका इस्तेमाल गर्दन, छाती, पेट और पेल्विस के किसी भी असामान्य लिम्फ नोड की जांच के लिए या यकृत, प्लीहा, या अन्य अंगों में इसकी पहुँच देखने के लिए किया जा सकता है।

चुंबकीय रेसोनेंस इमेजिंग स्कैन (Magnetic resonance imaging (MRI) scan)

यह तकनीक रेडियो तरंगों, मजबूत चुंबकीय क्षेत्र और गैडोलीनियम-आधारित कंट्रास्ट सामग्री (जो MRI चित्रों की स्पष्टता में सुधार करने के लिए इंट्रावेनस इंजेक्शन से इस्तेमाल की जाती है) का इस्तेमाल करके आंतरिक शरीर के अंगों के विस्तृत चित्र देती है।

इसका इस्तेमाल गर्दन, छाती, पेट और पेल्विस के किसी भी असामान्य लिम्फ नोड की जांच के लिए या यकृत, प्लीहा, या अन्य अंगों में इसकी पहुँच देखने के लिए किया जा सकता है। न्यूरोलॉजिकल लक्षणों वाले रोगियों में CNS के होने का पता लगाने के लिए यह बहुत संवेदनशील माना जाता है।

क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के असर की जांच | Response Assessment in CLL in Hindi

पूरा असर (Complete response/CR)

CR का मतलब है निम्नलिखित मानदंडों को पूरा करना: पेरिफेरल खून लिम्फोसाइट की गिनती <4 x 10^9/L; लिम्फैडेनोपैथी की अनुपस्थिति (मतलब, तालव्य नोड्स का व्यास </=1.5 सेमी होना चाहिए); स्प्लेनोमेगाली या हेपेटोमेगाली की अनुपस्थिति; संवैधानिक लक्षणों की अनुपस्थिति (यानी, वजन घटना, ज़्यादा थकान, बुखार, रात को पसीना आना); और वृद्धि कारक सहायता के बिना खून की गिनती का सामान्यीकरण (मतलब, न्युट्रोफिल >1.5 x 10^9/L, प्लेटलेट्स >100 x 10^9/L, हीमोग्लोबिन >11 g/dL)।

CR की पुष्टि के लिए एस्पिरेट और कोर बायोप्सी,<30% लिम्फोसाइट्स दिखाने वाली, के साथ अस्थि मज्जा मूल्यांकन की ज़रूरत होती है, जिसमें कोई बी लिम्फोइड नोड्यूल नहीं होते हैं।

थोड़ा असर (Partial response/PR)

PR का मतलब है कम से कम 2 महीने के लिए कम से कम 2 मानदंडों को पूरा करना: कम से कम 50% की घटाव – फेरिफेरल खून लिम्फोसाइट काउंट्स (बेसलाइन से), लिम्फैडेनोपैथी (कई प्रभावित नोड्स के उत्पादों के योग के आधार पर), हेपटोमेगाली, और / या स्प्लेनोमेगाली। इसके अलावा, कम से कम 2 महीने के लिए, बेसलाइन से 1 खून की गिनती में >/=50% का सामान्यीकृत या बढ़ाव होना चाहिए।

प्रगतिशील रोग (Progressive Disease/PD)

प्रगतिशील रोग का मतलब निम्न में से कोई है: बेसलाइन से कम से कम 50% की वृद्धि – लिम्फोसाइट गिनती, लिम्फैडेनोपैथी, हेपेटोमेगाली या स्प्लेनोमेगाली; किसी भी नए घावों की उपस्थिति; या बीमारी के कारण साइटोपेनिया की घटना (यानी, प्लेटलेट काउंट में बेसलाइन से 50% की कमी,> हीमोग्लोबिन के स्तर में बेसलाइन से 2 ग्राम / डीएल की कमी)।

स्थिर रोग (Stable disease/SD)

जिन रोगियों को प्रगतिशील बीमारी नहीं है, लेकिन पूरे असर (CR) या थोड़े असर (PR) के मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं उन्हें स्थिर बीमारी माना जाता है।

दुर्दम्य रोग (Refractory Disease)

आखिरी उपचार के 6 महीने के भीतर असर में विफलता होने या रोग की प्रगति होने को दुर्दम्य बीमारी कहा जाता है।

रोग का रीलैप्स होना (Disease Relapse)

प्रारंभिक पूरे असर (CR) या थोड़े असर (PR) के 6 महीने या उससे अधिक की अवधि के बाद रोग की प्रगति का एक सबूत रोग के रीलैप्स के रूप में जाना जाता है।

न्यूनतम शेष बचा रोग (Minimal Residual Disease/MRD)

जब ल्यूकेमिया सेल इलाज के बाद पारंपरिक इलाज तकनीक के बाद दिखाई नहीं देते, लेकिन ल्यूकेमिया सेल  का पता PCR जैसी अधिक संवेदनशील तकनीक से लगाया जा सकता है। इलाज के बाद MRD वाले रोगियों में बीमारी के फिर से होने की संभावना अधिक होती है।

 

क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया स्टेजिंग | Chronic Lymphocytic Leukemia Staging in Hindi

स्टेजिंग सिस्टम का उपयोग विभिन्न नैदानिक मापदंडों के आधार पर क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया की गंभीरता का वर्णन करने के लिए किया जाता है जैसे लिम्फोसाइटोसिस; लिम्फ नोड्स की भागीदारी; प्लीहा और/या जिगर का बढ़ना; हीमोग्लोबिन स्तर; और प्लेटलेट्स की गिनती। स्टेजिंग रोग के इलाज को निर्धारित करने में मदद करता है, और इस तरह से, सही इलाज नीति चुनने में मदद करते हैं।

“राय” (Rai) और “बिनेट” (Binet) क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के लिए दो सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली स्टेजिंग प्रणाली हैं। राय प्रणाली का इस्तेमाल ज्यादातर अमेरिका में किया जाता है और बिनेट प्रणाली का उपयोग मुख्य रूप से यूरोप में किया जाता है। राय प्रणाली बीमारी को 5 स्टेज (0 से IV तक) में बाँटती है जबकि बिनेट प्रणाली बीमारी को 3 स्टेज (ए, बी, और सी) में बाँटती है।

 

निम्न तालिका में विभिन्न चरणों और विभिन्न प्रणालियों के अनुसार क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) की विशेषता बतायी गईं हैं:

 

राय स्टेजिंग (Rai Staging)

राय स्टेज (Rai Stage) खतरे (Risk Group) विवरण
0 कम (Low) लिम्फोसाइटोसिस (>/=5*10^9/L खून में ल्यूकेमिया सेल और अस्थि मज्जा में 40% ल्यूकेमिया सेल); लिम्फ नोड्स, प्लीहा, या यकृत में कोई बढ़ाव नहीं; RBCs और प्लेटलेट संख्या सामान्य के करीब हैं।
I मध्यम (Intermediate) बढ़े हुए लिम्फ नोड्स वाला लिम्फोसाइटोसिस
II मध्यम (Intermediate) स्प्लेनोमेगाली और/या हेपेटोमेगाली वाला लिम्फोसाइटोसिस
III बड़ा (High) <11.0 g/dL या हेमटोक्रिट <33% हीमोग्लोबिन वाला लिम्फोसाइटोसिस
IV बड़ा (High) <100,000 / माइक्रोलिटर प्लेटलेट्स वाला लिम्फोसाइटोसिस

 

बिनेट स्टेजिंग (Binet Staging)

बिनेट स्टेज (Binet Stage) विवरण 
A हीमोग्लोबिन >/=10 g/dL, प्लेटलेट्स >/=100,000/mm^3 और <3 बढे हुए नोडल हिस्से
B हीमोग्लोबिन >/=10 g/dL, प्लेटलेट्स >/=100,000/mm^3 और >/=3 बढे हुए नोडल हिस्से
C हीमोग्लोबिन <10 g/dL और/या प्लेटलेट्स <100,000/mm^3

 

क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के पूर्वसंकेत कारक | Prognostic Factors of CLL in Hindi

विभिन्न नैदानिक अनुसंधान अध्ययनों से कई अन्य कारकों की पहचान हुई है, जो क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया के परिणाम की भविष्यवाणी कर सकते हैं। यह कारक स्टेजिंग प्रणाली में शामिल नहीं हैं, लेकिन क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) का इलाज शुरू करने से पहले इसे ध्यान में रखा जाता है। इस तरह के पूर्वानुमान कारकों के उदाहरण निम्नलिखित हैं:

प्रतिकूल रोगनिरोधी कारक (Adverse prognostic factors)

प्रतिकूल रोगनिरोधी कारकों के उदाहरणों में निम्नलिखित शामिल हैं-

 

  • साइटोजेनेटिक असामान्यताएं (क्रोमोसाम (chromosomes) के हिस्सों के 17 या 11 को हटाना, ट्राइसॉमी(trisomy) 12, TP53 जीन में म्यूटेशन, और >/=3 असंबंधित क्रोमोसोमल (chromosomal) असामान्यताएं);
  • फ्लो साइटोमेट्री-आधारित पैरामीटर (CD38, CD49d और ZAP-70); सीरम बीटा-2 माइक्रोग्लोबुलिन का बड़ा स्तर;
  • प्रोलिम्फोसाइट्स का बढ़ा हुआ अंश;
  • कम लिम्फोसाइट का समय दोहरीकरण;
  • अस्थि मज्जा भागीदारी के फैलाना का पैटर्न; और
  • बढ़ी उम्र

अनुकूल रोगनिरोधी कारक (Favorable prognostic factors)

अनुकूल रोगनिरोधी कारकों के उदाहरणों में निम्नलिखित शामिल हैं-

  • IGHV का क्यूटेटेड जीन शामिल है;
  • क्रोमोसाम (chromosomes) 13 के हिस्से को हटाना;
  • अस्थि मज्जा भागीदारी के गांठदार पैटर्न।

क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया का इलाज | Treatment of CLL in Hindi

क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया का इलाज कई कारकों पर निर्भर करता है, जिनमें शामिल हैं रोग की उम्र, स्वास्थ्य या कोमोर्बिडिटीज़ (comorbidities), स्टेज/खतरा समूह, इम्यूनोफेनोटाइपिक/साइटोजेनेटिक (immunophenotypic/cytogenetic) असामान्यता, आदि शामिल है। इसके और भी इस्तेमाल हो सकते हैं।

रोगी के इलाज का निर्णय लेने या देख-भाल करने का निर्णय रोग संबंधी लक्षणों (बुखार, रात को पसीना, वजन कम करना, आदि), प्रभावित अंग, प्रगतिशील भारी बीमारी, प्रगतिशील एनीमिया या थ्रोम्बोसाइटोपेनिया, लिम्फोसाइट दोहरीकरण समय आदि के आधार पर लिया जाता है। अगर कोई मौजूद नहीं है, तो रोगी की बारीकी से देख-रेख की जा सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय रोगी के इलाज के मूल्यांकन के बाद ऑन्कोलॉजिस्ट द्वारा लिया जाता है।

डेल(117p) या TP53 म्यूटेशन के बिना क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL without del(17p) or TP53 mutation)

कीमोइम्यूनोथेरेपी (कीमोथेरेपी के साथ मोनोक्लोनल एंटीबॉडी) या टार्गेटेड थेरेपी को कॉम्बिडिटी वाले दोनों, बुजुर्ग और युवा, रोगियों के लिए बेहतर इलाज माना जाता है।

रोगियों में, <65 वर्ष की आयु और कोमोर्बिडिटीज के बिना स्थिति में, कीमोइम्यूनोथेरेपी को बेहतर इलाज माना जाता है।

डेल(117p) या TP53 म्यूटेशन के साथ क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL with del(17p) or TP53 mutation)

टार्गेटेड थेरेपी को बुजुर्ग या युवा रोगियों के लिए बेहतर इलाज माना जाता है।

क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के लिए विभिन्न इलाज साधनों का संक्षिप्त विवरण | Brief description of various treatment modalities employed for CML in Hindi

कीमोथेरपी (Chemotherapy)

कीमोथेरपी (Chemotherapy)

 

कीमोथेरेपी का मतलब है कैंसर विरोधी दवा से किया जाने वाला इलाज जिससे तेज़ी से बढ़ने वाले कैंसर सेल को मारा या काम किया जाता है। क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के इलाज के लिए प्यूरीन एनालॉग्स और एल्केलेटिंग एजेंट सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले कीमोथेरप्यूटिक एजेंट हैं।

कीमोथेरेपी आम तौर पर क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के प्रबंधन के लिए इम्यूनोथेरेपी (मोनोक्लोनल एंटीबॉडी) के साथ इस्तेमाल किया जाता है। इसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं जैसे जी-मचलाना/उलटी, बाल झड़ना, थकान, सायटोपेनियस आदि। यह इसीलिए है क्योंकि यह इलाज कैंसर से सेल के अलावा सामान्य सेल पर भी अपना असर छोड़ता है।

कॉरटिकोस्टेराय्ड (Corticosteroids)

कॉरटिकोस्टेराय्ड (Corticosteroids)

यह उन दवाओं की श्रेणी है जो संरचनात्मक रूप से कोर्टिसोन, एड्रेनल कोर्टेक्स (adrenal cortex) द्वारा बनाये गए हार्मोन, जैसी हैं। कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स के उदाहरणों में डेक्सामेथासोन (dexamethasone) और प्रेडनिसोन (prednisone) शामिल हैं जो आमतौर पर क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के इलाज में इस्तेमाल होते हैं। इन दवाओं के अपने दुष्प्रभाव हो सकते हैं जैसे हाइपरग्लेसेमिया, वजन बढ़ना, मूड में बदलाव, हड्डियों में कमजोरी आदि।

मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (Monoclonal Antibodies)

मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (Monoclonal Antibodies)

मोनोक्लोनल एंटीबॉडी मानव निर्मित एंटीबॉडी हैं जिन्हें कैंसर कोशिकाओं की विशेषता वाले कुछ प्रोटीनों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। यह दवाएं कैंसर सेल के खिलाफ कार्य करने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करतीं हैं। क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के इलाज के लिए, ओबिनुतुजुमाब क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) सेल पर CD20 प्रोटीन से जुड़ जाता है और ल्यूकेमिया सेल को पहचानने और नष्ट करने में प्रतिरक्षा सेल की मदद करता है। रिटुक्सींमैब (Rituximab) और टोऑटमुमैब (toatumumab) अन्य मोनोक्लोनल एंटीबॉडी हैं जिन्हें आम तौर पर क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

 

क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के इलाज के लिए निम्नलिखित मोनोक्लोनल एंटीबॉडी का उपयोग किया जाता है:

रिटुक्सींमैब (Rituximab)

रिटुक्सींमैब (Rituximab)

रिटुक्सींमैब CD20 टार्गेटेड मोनोक्लोनल एंटीबॉडी है जो B सेल की सतह पर मौजूद प्रोटीन CD20 को बांधता है और निष्क्रिय करता है। यह कीमोथेरेपी के साथ मिलाकर क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के लिए प्रमुख इलाज की तरह स्वीकृत है। तब से, क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) वाले रोगियों के प्रबंधन के लिए कीमोथेरेपी के साथ रिटुक्सींमैब मुख्य मानक बन गया है। यह टार्गेटेड एजेंटों या कीमोथेराप्यूटिक एजेंटों के साथ रिलैप्स या दुर्दम्य रोग के रोगियों के लिए इलाज के रूप में स्वीकृत किया गया है।

उबाईनुटुज़ूमाब (Obinutuzumab)

उबाईनुटुज़ूमाब (Obinutuzumab)

उबाईनुटुज़ूमाब टाइप II मोनोक्लोनल एंटीबॉडी है जो बी-सेल की सतह पर मौजूद CD20 रिसेप्टर को रोकने के लिए रिटुक्सींमैब से अलग काम करता है जिसके परिणामस्वरूप क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) सेल ज़्यादा ख़त्म होते हैं। यह क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) वाले रोगियों के प्राथमिक इलाज के लिए कीमोथेरेपी के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा, यह उन चुनिंदा रोगियों के लिए एकल-एजेंट इलाज के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है जो दोनों, प्राथमिक या दृतीयक इलाजों, में कीमोथेरेपी को सहन नहीं कर सकते हैं।

ऑफ़ट्यूमुमाब (Ofatumumab)

ऑफ़ट्यूमुमाब (Ofatumumab)

ऑफ़ट्यूमुमाब एक दूसरी पीढ़ी का है, यह  (रिटुक्सींमैब की तुलना में) बड़ी हुयी प्रभावोत्पादकता उन टाइप I एंटी-CD20 मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कुछ रोगियों के लिए है जिनपर रिटुक्सींमैब का असर नहीं हो रहा है। रिटुक्सींमैब और उबाईनुटुज़ूमाब (Obinutuzumab) के समान, यह क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के रोगियों के प्राथमिक इलाज के लिए (या कीमोथेरेपी के साथ जोड़कर), या रीलैप्स्ड या दुर्दम्य रोग के प्रबंधन के लिए एकल-एजेंट उपचार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका उपयोग रीलैप्स या दुर्दम्य क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) वाले रोगियों के साथ भी रखरखाव उपचार के रूप में भी किया जा सकता है जिन्हें कम से कम दो पूर्व लाइनों की थेरेपी के बाद पूर्ण या आंशिक असर मिला है।

अलेमतुजुमैब (Alemtuzumab)

अलेमतुजुमैब (Alemtuzumab)

अलेमतुजुमैब एक मोनोक्लोनल एंटीबॉडी है जो बी-सेल, टी-सेल, मारने वाले प्राकृतिक सेल, ईोसिनोफिल (eosinophils), डेंड्राइटिक(dendritic) सेल और मैक्रोफेज(macrophages) की सतह पर पाए जाने वाले CD52 एंटीजन को टारगेट करता है। अलेमतुजुमैब को एक एजेंट के रूप में या रिटुक्सींमैब के साथ जोड़कर रीलैप्स्ड या दुर्दम्य क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) वाले या बिना डेल(17p)/TP53 म्यूटेशन के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। रिटुक्सींमैब के साथ, इसे प्राथमिक सेटिंग में डेल(17p)/TP53 म्यूटेशन पॉजिटिव क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

टार्गेटेड थेरेपी Targeted Therapy

टार्गेटेड दवा क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) सेल की निश्चित जीन या प्रोटीन की विशेषता को लक्षित करने के लिए बनाई गईं हैं।

यह कीमोथेरेपी दवा के दुष्परिणामों को घटाकर इसमें फायदे बढ़ाने में मदद करता है।

 

निम्नलिखित टार्गेटेड दवाओं को क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाता है:

इब्रूटिनिब (Ibrutinib)

इब्रूटिनिब (Ibrutinib)

इब्रूटिनिब मौखिक रूप से सक्रीय, ब्रूटन के टाइरोसिन किनसे/kinase (BTK) का अपरिवर्तनीय अवरोधक है, यह बी-सेल रिसेप्टर (BCR) सिग्नलिंग में शामिल एक एंजाइम है जो बी-सेल के पनपने और फैलने में मदद करता है। इब्रूटिनिब को शुरू में रीलैप्स्ड या दुर्दम्य क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) वाले रोगियों के इलाज के लिए स्वीकृत किया गया था, लेकिन अब इसे प्राथमिक सेटिंग्स में इस्तेमाल करने की मंजूरी मिल गयी है, खासकर डेल(17p) या TP53 म्यूटेशन वाले रोगियों के लिए।

इब्रूटिनिब के साथ एकल-एजेंट थेरेपी को बड़ी कोमोर्बिडिटी वाले रोगियों के इलाज के लिए इस्तेमाल करने को कहा जाता है, जो कमज़ोर हैं (कीमोथेरेपी को बर्दाश्त नहीं कर सकते), और >/=65 या कम उम्र के बड़ी कोमोर्बिडिटी वाले रोगियों के लिए इस्तेमाल हो सकता है। यह रीलैप्स या दुर्दम्य रोग वाले रोगियों के इलाज के लिए भी सुझाया जाता है। अब इसे डेल(17p) या TP53 म्यूटेशन पॉजिटिव क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) वाले मरीजों के लिए प्राथमिक थेरेपी के रूप में या रीलैप्स्ड/दुर्दम्य रोग के लिए एक मानक उपचार माना जाता है। इब्रूटिनिब लिम्फोसाइट गिनती में प्रारंभिक थोड़ी वृद्धि कर सकती है जो रोग का बढ़ना नहीं जताता है और यह कई हफ्तों तक जारी रह सकता है।

ऐकलाब्रूटिनिब (Acalabrutinib)

ऐकलाब्रूटिनिब (Acalabrutinib)

ऐलेटब्रुटिनिब दूसरी पीढ़ी का BTK अवरोधक है, जिसे हर उम्र के लिए, रीलैप्स्ड या दुर्दम्य क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) वाले रोगियों के इलाज के लिए स्वीकृत किया गया है। ध्यान दें, ऐकलाब्रूटिनिब BTK C481S म्यूटेशन वाले इब्रूटिनिब-विरोधी क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के इलाज में सहायक नहीं है, जो इब्रूटिनिब के इलाज के खिलाफ प्रतिरोधक विकसित करने के सामान्य कारणों में से एक है।

आइडिलालिसिब (Idelalisib)

आइडिलालिसिब मौखिक रूप से सक्रिय, p110 डेल्टा (δ) इसोफोर्म-चयनात्मक अवरोधक फॉस्फॉइनोसाइड 3 किनेज (PI3K) है, जो बी-सेल सक्रियण, बढ़ने और पनपने में शामिल एक एंजाइम है। आइडिलालिसिब, रिटुक्सींमैब के साथ, इसे यूएस एफडीए द्वारा रिलैप्स या दुर्दम्य क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) वाले रोगियों के इलाज के लिए स्वीकृत किया गया है। रिटुक्सींमैब के साथ आइडिलालिसिब प्रतिकूल रोगनिवारक कारकों के लिए भी प्रभावी है जैसे डेल(17p) या TP53 म्यूटेशन, ZAP70, CD38 एक्सप्रेशन, अनम्यूटेड IGHV, और एलिवेटेड बीटा-2 माइक्रोग्लोब्युलिन ((>4 mg/L)। रीलैप्स्ड या दुर्दम्य वाले कुछ रोगियों के लिए आइडिलालिसिब के साथ एकल-एजेंट थेरेपी सहायक हो सकती है।

डुवेलिसिब (Duvelisib)

डुवेलिसिब मौखिक रूप से सक्रिय है, यह PI3K3γ और PI3Kδ इसोफोर्म-चयनात्मक अवरोधक है जो B-सेल के फैआव को दबाता है और क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) सेल में एपोप्टोसिस को बढ़ाता है। डुवेलिसिब के साथ सिंगल-एजेंट थेरेपी को रीलैप्स्ड या दुर्दम्य क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) वाले रोगियों के इलाज के लिए बेहतर माना जाता है।

वेनेटोक्लेस (Venetoclax)

वेनेटोक्लेस (Venetoclax)

वेनेटोक्लेस मौखिक रूप से सक्रिय वह चयनात्मक अवरोधक बी-सेल ल्यूकेमिया/लिम्फोमा-2 (BCL2) प्रोटीन है, जो प्रोटीन बी-सेल एपोप्टोसिस और कैंसर के विकास में पाया जाता है। वेनेटोक्लेस को रीलैप्स्ड या दुर्दम्य क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) वाले उन रोगियों के इलाज के लिए एकल-एजेंट थेरेपी के रूप में या रिटुक्सींमैब के साथ स्वीकृत कर लिया गया है जो पहले इब्रूटिनिब या आइडिलालिसिब का इलाज करवा चुके हैं। ट्यूमर लिम्फ सिंड्रोम (TLS), ऐसा सिंड्रोम है जो ल्यूकेमिया सेल  के बड़े पैमाने पर विनाश से होता है जिससे रक्त में उनके अंश पहुँच जाते हैं और गुर्दे को खराब कर देते हैं, इसे वेनेटोक्लेस के इलाज वाले कुछ रोगियों में देखा गया है।

 

इम्यून चेकपॉइंट इनहिबिटर्स (Immune Checkpoint Inhibitors)

इम्यून चेकपॉइंट अवरोधक जैसे पेम्ब्रोलिज़ुमैब और निवोलुम्बैब ने रिक्टर ट्रांसफॉर्मर केमोथेरेपी या टार्गेटेड थेरेपी के साथ रोगियों में असर दिखाया है।

 

एडोप्टिव टी-सेल थेरेपी (Adoptive T-cell Therapy)

इसी तरह, एडोप्टिव टी-सेल थेरेपी को क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) सेल की सतह पर मौजूद CD19-सतह प्रोटीन और/या अन्य प्रोटीनों की ओर लक्षित किया जाता है, इसने विभिन्न नैदानिक परीक्षणों में रोमांचक परिणामों का प्रदर्शन किया है। इसके अलावा, आनुवांशिक रूप से संशोधित CART सेल कई वर्षों तक बने रहते हैं जो बड़े खतरे के लक्षणों वाले रोगियों में न्यूनतम अवशिष्ट रोग (MRD) को खत्म करने के लिए फायदेमंद होते हैं। ल्यूकेमिया के इलाज के लिए CART थेरेपी के संभावित नैदानिक अनुप्रयोग को ध्यान में रखते हुए, इसे जल्द ही क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के इलाज के नैदानिक इस्तेमाल में शामिल किया जा सकता है।

 

स्टेम सेल ट्रांसप्लांट (Stem Cell Transplant/SCT)

स्टेम सेल ट्रांसप्लांट (Stem Cell Transplant/SCT)

SCT खराब रोगनिरोधी कारकों वाले कुछ रोगियों को क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के इलाज के लिए दिया जा सकता है जो इसके लिए अच्छे उम्मीदवार हैं (अच्छे स्वास्थ्य वाले छोटी उम्र के रोगी)। मुख्य रूप से एलोगेनिक (Allogenic) SCT को क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाता है:

एलोजेनिक (Allogeneic) SCT

इस तकनीक में, तेज़ खुराक की कीमोथेरेपी के बाद रोगी को दी जाने वाले स्वस्थ स्टेम सेल को डोनर के रूप में अन्य व्यक्ति से प्राप्त किया जाता है। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि डोनर करीबी खून का रिश्तेदार (भाई बेहतर होगा) है ताकि डोनर HLA रोगी से मेल खा सके।

एलोजेनिक SCT ऑटोलॉगस SCT की तुलना में अधिक फायदेमंद है क्योंकि डोनर की स्टेम सेल बचे हुए ल्यूकेमिया सेल (ग्राफ्ट बनाम ल्यूकेमिया के प्रभाव की वजह से) को हटाने में मदद करते हैं। लेकिन, एलोजेनिक SCT, ग्राफ्ट-बनाम-होस्ट बीमारी के कारण खतरे से भरा है जिसमें डोनर से बने नए इम्यून सेल शेष बचे ल्यूकेमिया सेल इन्हें ख़त्म कर देते हैं।

 

रेडिएशन थेरेपी (Radiation Therapy)

रेडिएशन थेरेपी (Radiation Therapy)

रेडिएशन थेरेपी (या रेडियोथेरेपी) में तेज़ ऊर्जा एक्स-रे या अन्य तेज़ विकिरण का इस्तेमाल होता है जिसे कैंसर सेल को मारने के लिए उनपर सीधा डाला जाता है। रेडियोथेरेपी आमतौर पर क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के इलाज के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता है। हालांकि, एक एक्सटर्नल बीम थेरेपी को कभी-कभी इस्तेमाल निम्नलिखित के लिए किया जा सकता है (प्राथमिक इलाज के साथ): अन्य अंगों पर बढ़े हुए प्लीहा दबाने के लिए; स्टेम सेल ट्रांसप्लांट (SCT) से पहले तेज़ खुराक कीमोथेरेपी के साथ; और ल्यूकेमिया सेल के आक्रमण से हड्डियों में हुए दर्द को कम करने के लिए।

 

सहायक देख-भाल (Supportive Care)

सहायक देख-भाल क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के इलाज का एक अभिन्न अंग है। इसका उपयोग बीमारी से होने वाले कुछ लक्षणों या क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के इलाज से जुड़ी कुछ समस्याओं को दूर करने के लिए किया जा सकता है।

क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के सहायक देख-भाल के उदाहरणों में इम्युनोग्लोबुलिन, एंटीबायोटिक्स और एंटीवायरल ड्रग्स शामिल हैं (संक्रमण के इलाज के लिए जो आमतौर पर क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के रोगियों को होते हैं या जो क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव के कारण होते हैं); टीका (कुछ संक्रमणों के खिलाफ प्रोफिलैक्सिस के लिए); रक्त उत्पादों के साथ ट्रांसफ्यूजन, दर्द और अन्य लक्षणों को कम करने के लिए दवाओं का उपयोग करना जिसमें उल्टी, थकान या रक्तस्राव शामिल है या दर्द के लिए एक्सटर्नल बीम रेडिएशन थेरेपी, आदि।

इलाज का फैसला करने से पहले हर इलाज की लाभ और हानि और बाद में होने वाली दिक्कतों को समझना बहुत ज़रूरी है। कभी-कभी मरीज़ की पसंद और सेहत भी इलाज को चुनने में बहुत महत्त्वपूर्ण होते हैं।

 

क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) के इलाज के बुनियादी लक्ष्य निम्नलिखित हैं:

ज़िन्दगी लम्बी करना।

लक्षणों को काम करना।

ज़िन्दगी की गुणवत्ता में सुधार लाना।

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