गुर्दे के कैंसर (किडनी कैंसर) का इलाज | Kidney Cancer Treatment in Hindi

अगर संकेतों और लक्षणों के कारण ऐसा लगता है कि व्यक्ति को किडनी का कैंसर है, तो रोग के इलाज की जांच करने में और उपयुक्त इलाज विकल्प चुनने में टीएनएम से मदद मिल सकती है।

किडनी के कैंसर का इलाज कई बातों पर निर्भर करता है जैसे किडनी कैंसर की स्टेज, इसकी एकतरफा/द्विपक्षीय (unilateral/bilateral) प्रकृति, रोगी की हालत और अन्य बातें। लेकिन अंतिम निर्णय रोगी के इलाज के मूल्यांकन के बाद ऑन्कोलॉजिस्ट द्वारा लिया जाता है।

स्थानीयकृतऔर विकसित किडनी के कैंसर का इलाज | Treatment of Localised and Locally Advanced Kidney Cancer explained in Hindi

गैर-मेटास्टेटिक (non-metastatic) किडनी के कैंसर के इलाज पर बात करते हैं।

इसे T1 कहा जाता है जब ट्यूमर 7 सेमी या उससे कम होता है और किडनी तक ही सीमित होता है।

T1 - जब ट्यूमर 7 सेमी या उससे कम होता है

T1 रोग के लिए सर्जरी से ट्यूमर को निकालना  Partial या Radical नेफ्रेक्टोमी (nephrectomy) इसका बेहतर इलाज है।

इसे T2 कहा जाता है जब ट्यूमर 7 सेमी या उससे ज़्यादा होता है और किडनी तक ही सीमित होता है।

T2 - ट्यूमर 7 सेमी या उससे ज़्यादा होता है

T3 में ऐसे मामले शामिल हैं जब ट्यूमर किसनी की नसों (renal veins) या किडनी साइनस वसा (renal sinus fat) में फैल जाता है।

T3 - ट्यूमर किसनी की नसों (renal veins) या किडनी साइनस वसा (renal sinus fat) में फैल जाता है।

इसमें ऐसे मामले भी शामिल हैं जिनमें ट्यूमर पेरिनेल वसा (perirenal fat) में फैल जाता है लेकिन जेरोटा फस्किआ (gerota’s fascia) से आगे नहीं बढ़ता है, जैसा कि आप इस चित्र में देख सकते हैं।

T3 - पेरिनेल वसा (perirenal fat) में फैल जाता है

अधम वेना कावा (inferior vena cava) में ट्यूमर के बढ़ने को भी T3 कहते हैं।

T3 - अधम वेना कावा (inferior vena cava) में ट्यूमर के बढ़ने

और जब ट्यूमर जेरोटा फस्किआ (gerota’s fascia) से आगे बढ़ जाता है, तो इसे T4 कहा जाता है।

T4 - ट्यूमर जेरोटा फस्किआ (gerota’s fascia) से आगे बढ़ जाता है

इप्सिलैटरल (ipsilateral) अधिवृक्क ग्रंथि (adrenal gland) में प्रवेश को भी T4 कहते हैं।

T4, - इप्सिलैटरल (ipsilateral) अधिवृक्क ग्रंथि (adrenal gland) में प्रवेश

जैसा कि आप इस चित्र में देखेंगे, किडनी के पास के लिम्फ नोड्स का शामिल होना N1 कहलाता है

N staging - किडनी के पास के लिम्फ नोड्स का शामिल होना

रेडिकल नेफ्रेक्टोमी (radical nephrectomy) से ट्यूमर को सर्जरी करके निकालना T2, T3, T4 या नोड-पॉजिटिव (node positive) रोग के लिए प्राथमिक इलाज हैं।

ट्यूमर की सटीक जांच के साथ रोगी की स्थिति और रोगी की दिक्कतों को समझने के बाद सर्जरी करने और सरकरी के प्रकार का निर्णय ऑन्कोलॉजिस्ट द्वारा लिया जाता है।

मेटास्टैटिक किडनी के कैंसर का इलाज | Treatment of Metastatic Kidney Cancer explained in Hindi

और अंत में, हम किडनी के कैंसर की M स्टेजिंग या मेटास्टेटिक स्टेजिंग की बात करेंगे।

यह चित्र यकृत (liver) में कई मेटास्टेटिक ढेर दिखाता है।

यकृत (liver) में कई मेटास्टेटिक ढेर

और यहाँ कैंसर कई गांठदार ढेरों के रूप में फेफड़ों (lungs) में फैल गया है।

फेफड़ों (lungs) में फैल गया है।

जैसा आप चित्र में देखेंगे, यह पेरिटोनियल (peritoneal) ढेरों के रूप में पेरिटोनियम (peritoneum) में भी फैल सकता है।

पेरिटोनियम (peritoneum) में भी फैल सकता है

ट्यूमर अधिवृक्क ग्रंथि (adrenal gland) में मेटास्टेटिक ढेर भी देखा जा सकता है।

अधिवृक्क ग्रंथि (adrenal gland) में मेटास्टेटिक ढेर भी देखा जा सकता है

कभी-कभी, यह दिमाग़ या हड्डियों तक भी फैल जाता है।

मेटास्टेटिक रोग के रोगियों के लिए टार्गेटेड दवा (targeted therapy) और/या इम्यूनोथेरेपी (immunotherapy)  ज़्यादातर प्राथमिल इलाज माना जाता है, किडनी के कैंसर के इलाज के लिए बहुत सारी खाने वाली दवाएं उपलब्ध हैं।

मेटास्टैटिक बीमारी वाले रोगी में, कीमोथेरेपी शुरू करने के बाद कभी भी, अगर सर्जन को लगता है कि इस रोग को सर्जरी करके निकाला जा सकता है, तो मेटास्टेटिक रोग में भी सर्जरी करके इलाज करने का उपयोग किया जा सकता है I और कभी-कभी, मेटास्टेटिक रोग में, बाद में टार्गेटेड दवा (targeted therapy) और/या इम्यूनोथेरेपी (immunotherapy)  के साथ या बिना, अपफ्रंट सर्जरी से निकालकल इलाज किया जा सकता है।

लेकिन किमोथेरेपी शुरू करने या सर्जरी करने का आखिरी निर्णय ऑन्कोलॉजिस्ट द्वारा लिया जाता है जो रोगी के सटीक स्थितियों, कॉमरेडिटीज़, स्थिति, अन्य कारकों पर निर्भर करता है।

किडनी के कैंसर के विभिन्न स्टेजों के इलाज विकल्प | Treatment options for different stages of Kidney Cancer in Hindi

स्टेज I (Stage I)

T1 N0 M0

सर्जरी (रेडिकल नेफरेक्टॉमी या पार्शियल नेफ्रक्टॉमी/radical nephrectomy or partial nephrectomy) को बेहतर इलाज माना जाता है।

जो रोगी सर्जरी नहीं करवा सकते, उनके कुछ मामलों में धमनीय एम्बोलाईजेशन (arterial embolization) या पृथक्करण (ablation) इस्तेमाल किया जा सकता है।

स्टेज  II (Stage II)

T2 N0 M0

सर्जरी (रेडिकल नेफरेक्टॉमी या पार्शियल नेफ्रक्टॉमी/radical nephrectomy or partial nephrectomy) को बेहतर इलाज माना जाता है।

स्टेज III (Stage III)

T1-2 N1 M0

T3 N0-1 M0

सर्जरी (रेडिकल नेफरेक्टॉमी या पार्शियल नेफ्रक्टॉमी/radical nephrectomy or partial nephrectomy) को बेहतर इलाज माना जाता है।

स्टेज IV (Stage IV)

T4 कोई भी N M0

कोई भी T कोई भी N M1

टार्गेटेड दवा (targeted therapy) और/या इम्यूनोथेरेपी (immunotherapy) के को ज़्यादातर प्राथमिल इलाज माना जाता है।

मेटास्टेसिस को हटाकर/ हटाए बिना किडनी को सर्जरी करके निकालना कुछ मामलों में अपनाया जा सकता है।

लक्षणों को दूर करने और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए पैलिएटिव ट्रीटमेंट (दोष घटानेवाला इलाज) किया जा सकता है।

किडनी के कैंसर के इलाज विकल्प | Overview of Kidney Cancer Treatment Options in Hindi

सर्जरी (Surgery)

सर्जरी (Surgery)

सर्जरी से रोग का इलाज लम्बे समय तक काम करता है और इसे ज्यादातर मामलों में किडनी के कैंसर में बेहतर इलाज माना जाता है। कभी-कभी, खून बहना और दर्द जैसे लक्षणों को दूर करने के लिए सर्जरी को पैलिएटिव सेटिंग (palliative setting) की  तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। किडनी कैंसर का इलाज करने के लिए निम्न प्रकार की सर्जरी का उपयोग किया जा सकता है:

 

आंशिक नेफ्रेक्टोमी (Partial Nephrectomy)

इस सर्जरी में, केवल कैंसर वाले किडनी ऊतकों को थोड़ी जगह छोड़कर निकाला जाता है जिससे वाकी किडनी अपनी जगह सलामत रहती है। इस सर्जरी को कभी-कभी नेफ्रॉन-स्पेयरिंग (nephron-sparing) सर्जरी भी कहा जाता है। यह आमतौर पर प्रारंभिक स्टेज की बीमारी में इस्तेमाल किया जाता है जब ट्यूमर का आकार छोटा होता है।

 

रेडिकल नेफ्रेक्टोमी (Radical Nephrectomy)

इस सर्जरी में, संबंधित अधिवृक्क (एड्रेनल) ग्रंथि, पास के लिम्फ नोड्स और गुर्दे के आसपास के फैटी टिशू के साथ पूरे गुर्दे को हटा दिया जाता है। यह आमतौर पर तब इस्तेमाल होता है जब कैंसर किडनी के अधिकांश ऊतकों को प्रभावित कर देता है। कभी-कभी, अधिवृक्क (एड्रेनल) ग्रंथि को छोड़ा जा सकता है, खासकर जब ट्यूमर सिर्फ किडनी के निचले हिस्से में हो।

धमनीय एम्बोलाईजेशन (Arterial Embolization)

इस तकनीक में, अक्रिय छोटे कणों के साथ खून में ट्यूमर सेल को रोककर किडनी ट्यूमर को ख़त्म किया जाता है। इसका उपयोग किडनी तक सीमित छोटे ट्यूमर के लिए किया जाता है, जो ट्यूमर को कम करने के लिए सर्जरी से पहले, या सर्जरी ना की जा सकने की स्थिति वाले ट्यूमर में पैलिएटिव सेटिंग की तरह।

एबलेशन (Ablation)

एबलेशन ऐसी तकनीक है जिसमें ट्यूमर को शरीर से निकाले बिना ख़त्म किया जाता है। रेडियोफ्रीक्वेंसी एबलेशन (Radiofrequency Ablation/RFA) में उच्च-ऊर्जा रेडियो वेव इस्तेमाल की जाती है, माइक्रोवेव एबलेशन (Microwave Ablation/MWA) तकनीक में माइक्रोवेव इस्तेमाल की जाती है, जबकि ट्यूमर को ख़त्म करने के लिए क्रायोब्लेक्शन (Cryoablation) में बहुत ठंडी गैसें इस्तेमाल होतीं हैं। यह रोगियों के छोटे ट्यूमर में इस्तेमाल होता है जिनको सर्जरी से ठीक नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसके दुष्प्रभाव कम हैं।

टार्गेटेड थेरेपी (Targeted Therapy)

टार्गेटेड थेरेपी (Targeted Therapy)

टार्गेटेड दवाओं को पेट के कैंसर सेल क विशिष्ट जीन या प्रोटीन को देखकर बनाया जाता है। नैदानिक तकनीकों में प्रगति के साथ, पेट के कैंसर के लिए आनुवंशिक असामान्यताएं सामने आईं हैं जिन्हें टार्गेटेड दवाओं की मदद से ठीक किया जा सकता है। टार्गेटेड दवा थेरेपी को पारंपरिक साइटोटोक्सिक (cytotoxic) कीमोथेरेपी के मुकाबले अपनी बेहतर प्रभावकारिता और सुरक्षा के कारण बड़ी स्टेज के किडनी के कैंसर के लिए बेहतर इलाज माना गया है।

सूनिटीनीब (Sunitinib)

सूनिटीनीब (Sunitinib)

यह बहु-कार्यात्मक किनेज अवरोधक है जो कई टाइरोसिन केनेज (tyrosine kinases) को टारगेट करती है, इंट्रासेल्युलर एंजाइम जो कोशिकाओं के विकास और फैलाव को तेज़ करते हैं। इसे बड़ी-स्टेज के क्लियर सेल रीनल कैंसर के मरीजों के लिए प्राथमिल इलाज माना जाता है।

सोराफेनीब (Sorafenib)

सोराफेनीब (Sorafenib)

यह किनेसेस का एक छोटा अणु अवरोधक है जो कैंसर सेल के विकास और फैलाव में होता है। इसे क्लियर सेल रीनल कैंसर के रोगियों में माध्यमिक स्तर की थेरेपी की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है, जिन्हें पहले सूनिटीनीब (sunitinib), या बेवसिज़ुमाब (bevacizumab) दी जा चुकी हो। इसमें गैर-क्लियर सेल हिस्टोलोजी वाले बड़ी स्टेज के रीनल कैंसर वाले रोगियों के इलाज में कम प्रभावकारिता देखी गयी है।

पैजोपानिब (Pazopanib)

पैजोपानिब (Pazopanib)

यह मौखिक एंजियोजिनेसिस (angiogenesis) (रक्त वाहिकाओं का बनना) अवरोधक है जो ट्यूमर सेल के विकास और फैलाव के लिए जिम्मेदार कई कारकों को रोकता है। इसे बड़ी-स्टेज क्लियर सेल रीनल कैंसर के मरीजों का पसंदीदा प्रथम-उपचार माना जाता है। यह एडवांस-स्टेज क्लियर सेल रीनल कैंसर के रोगियों के लिए माध्यमिक स्तर की थेरेपी की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

ऑक्सिटिनिब (Axitinib)

ऑक्सिटिनिब (Axitinib)

यह एक चयनात्मक, दूसरी श्रेणी का एंजियोजिनेसिस (angiogenesis) अवरोधक है। बड़ी-स्टेज के क्लियर सेल रीनल कैंसर के रोगियों के लिए इसे प्राथमिक और बाद की थेरेपी (बेहतर) की तरह इस्तेमाल किया जाता है।

टेमसिरोलीमस (Temsirolimus)

टेमसिरोलीमस (Temsirolimus)

यह रैपामाइसिन (mTOR) प्रोटीन के मैमेलियन टारगेट का अवरोधक है जो सेल की वृद्धि, एंजियोजिनेसिस (angiogenesis) और एपोप्टोसिस (apoptosis) (क्रमादेशित सेल का खात्मा) को नियंत्रित करता है। यह काम-जोखिम वाले और गैर-स्पष्ट कोशिका हिस्टोलोजी और खराब रोग-संबंधी विशेषताओं वाले रोगियों में बड़ी-स्टेज क्लियर सेल रीनल कैंसर के लिए प्राथमिक इलाज माना जाता है।

ऐवरोलीमस (Everolimus)

ऐवरोलीमस (Everolimus)

यह मौखिक mTOR अवरोधक है। इसे आमतौर पर बड़ी-स्टेज क्लियर सेल रीनल कैंसर वाले रोगियों में बाद की थेरेपी के रूप में और बड़ी-स्टेज रीनल कैंसर और नॉन-क्लियर सेल हिस्टोलोजी के रोगियों के लिए प्राथमिक थेरेपी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

बेवसिज़ुमाब (Bevacizumab)

बेवसिज़ुमाब (Bevacizumab)

यह मोनोक्लोनल एंटीबॉडी है जो एंजियोजेनेसिस (angiogenesis) को रोकता है। इंटरफेरॉन (Interferon) (IFN)-अल्फा के साथ बेवसिज़ुमाब (Bevacizumab) को बड़ी-स्टेज के क्लियर सेल रीनल कैंसर वाले रोगियों के लिए प्राथमिल इलाज माना जाता है। इसे, क्लियर सेल और नॉन-क्लियर सेल रीनल कैंसर, दोनों के इलाज के लिए सिंगल-एजेंट थेरेपी के रूप में भी दिया जा सकता है।

कैबोज़नटिनिब (Cabozantinib)

कैबोज़नटिनिब (Cabozantinib)

यह कई टाइरोसिन (tyrosine) किनेस का एक छोटा-अणु अवरोधक है जो कैंसर कोशिकाओं के विकास और फैलाव के लिए जिम्मेदार है। इसे बड़ी-स्टेज के क्लियर सेल रीनल कैंसर के बाद रोगियों के प्राथमिल इलाज माना जाता है।

लेंवटिनिब (Lenvatinib)

लेंवटिनिब (Lenvatinib)

यह बहु-लक्षित टाइरोसिन (tyrosine) किनेस अवरोधक है, जिसे एवरोलिमस के साथ जोड़कर बड़ी-स्टेज के क्लियर सेल रीनल कैंसर के लिए बाद में दिए जाने वाली प्राथमिक थेरेपी की तरह इस्तेमाल किया जाता है।

इम्यूनोथेरेपी (Immunotherapy)

इम्यूनोथेरेपी (Immunotherapy)

रोगी प्रतिरक्षा प्रणाली से बचने के लिए कैंसर सेल इन सेल पर हमले से बचने के लिए कुछ तंत्र का उपयोग करती हैं। इम्यूनोथेरेप्यूटिक एजेंट कैंसर सेल को पहचानने और मारने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को शुरू करते हैं।

इम्यूनोथेरेपी दवाएं जिन्हें रेनेल कैंसर के इलाज के लिए स्वीकार किया गया है:

इंटरल्युकिन(Interleukin)-2 और INF-अल्फ़ा

इंटरल्युकिन -2 का इस्तेमाल इससे जुड़े गंभीर दुष्प्रभावों के कारण सीमित है, जैसे कम रक्तचाप, फुफ्फुस बहाव, अत्यधिक थकान, सांस लेने में कठिनाई, दिल की धड़कन में तेज़ी, तेज़ बुखार, ठंड लगना, किडनी खराब होना, दिल का दौरा, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रक्तस्राव और मनोवैज्ञानिक परिवर्तन। INF-अल्फ़ा को आमतौर पर बेवसिज़ुमाब (Bevacizumab) (एक लक्षित दवा) के साथ इस्तेमाल किया जाता है।

निवोलूमैब (Nivolumab)

यह चुनिंदा प्रोग्रामर डेथ रिसेप्टर-1 (PD-1) की परस्पर क्रिया को रोकता है जो अपने लिगेंड्स (PD-L1 और सामान्य) के साथ सक्रिय T सेल पर प्रभाव डालती है जिसका प्रभाव सामान्य सेल और ट्यूमर के सेल पर पड़ता है। किडनी के कैंसर के इलाज के लिए निवोलूमैब (Nivolumab) का प्रभाव ट्यूमर कोशिकाओं की सतह पर PD-L1 के स्तर से जुड़ा नहीं है।

इपीलिमुमाब (Ipilimumab)

यह साइटोटोक्सिक टी-लिम्फोसाइट (T-lymphocyte) एंटीजन 4 (CTLA-4) के मेल को रोकता है, जो एक सक्रिय T कोशिकाओं पर शुरू होने वाला एक नकारात्मक रेगुलेटर है, जिसके लिगेंड्स CD80 / CD86 ट्यूमर या सामान्य सेल पर असर करते है। निवोलूमैब (Nivolumab) और इपीलिमुमाब (Ipilimumab) के जोड़ को बड़ी स्टेज के स्पष्ट क्लियर सेल रीनल कैंसर वाले मध्यवर्ती और कम-जोखिम वाले रोगियों के लिए प्राथमिक इलाज माना जाता है।

बोन डायरेक्टेड थेरेपी (Bone Directed Therapy)

किडनी के कैंसर का हड्डियों तक फैलाव होने से हड्डियों में दर्द, फ्रैक्चर, हाइपरकेमिया आदि जैसे विभिन्न लक्षण हो सकते हैं। हड्डी के मेटास्टेसिस के लक्षणों को दूर करने के लिए, और आगे की दिक्कतों को ख़त्म करने के लिए, आम तौर पर निम्नलिखित बोन डायरेक्टेड थेरेपी दी जाती हैं:

बिसफ़ॉस्फ़ोनेट (Bisphosphonates)

बिसफ़ॉस्फ़ोनेट (Bisphosphonates)

बिसफ़ॉस्फ़ोनेट्स (जैसे ज़ोलेड्रोनिक (Zoledronic) एसिड, पीमिड्रोनिक(Pamidronic) एसिड, आदि) आम तौर पर, हड्डियों को दो प्रकार के हड्डी सेल से रीमॉडेल किया जाता है: ओस्टियोब्लास्ट्स (osteoblasts) (वह हड्डियों के घनत्व को बढ़ाते हैं) और ऑस्टियोक्लास्ट्स (osteoclasts) (वह हड्डियों के घनत्व को कम करते हैं)। बिसफ़ॉस्फ़ोनेट्स उनमें एपोप्टोसिस (प्राकृतिक कोशिका का खात्मा) को जगाकर ओस्टियोक्लास्ट की गति कम करता है, और इस प्रकार, हड्डी के घनत्व को बनाए रखने और हड्डी मेटास्टेसिस के लक्षणों को दूर करने में मदद करता है। बिसफ़ॉस्फ़ोनेट्स कुछ बुरे प्रभाव भी डाल सकता है जैसे फ्लू समान लक्षण, रेनल की शिथिलता, हाइपोकैल्सीमिया और कभी-कभी, जबड़े का ओस्टियोनीक्रोसिस (ONJ)।

डेनोसुमाब (Denosumab)

डेनोसुमाब (Denosumab)

डेनोसुमाब (Denosumab) एक मोनोक्लोनल एंटीबॉडी है जो RANKL को बांधता है और ऑस्टियोक्लास्ट (osteoclast) परिपक्वता को रोकता है, ऐसा करके यह हड्डी का फिर से खराब होना रोकता है और हड्डी के घनत्व को बनाए रखने और हड्डी मेटास्टेसिस के लक्षणों से राहत देने में मदद करता है। यह बुरे प्रभाव भी डाल सकता है जैसे हाइपोकैल्सीमिया(hypocalcemia), जबड़े का ऑस्टियोनेक्रोसिस (osteonecrosis) आदि।

पैलिएटिव ट्रीटमेंट (दोष घटानेवाला इलाज)

इससे किडनी कैंसर से होने वाली दिक्कतों में राहत और लक्षणों में राहत मिलती है जिससे ज़िन्दगी की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिल सकती है। इसमें दवाएं शामिल हैं जिससे दर्द और लक्षणों को काम किया जा सकता है जैसे उलटी, थकान, सर्जरी, रेडिओथेरेपी, एम्बोलाईजेशन या एबलेशन। इसके और भी कई तरह के उपयोग हो सकते हैं।

इलाज का फैसला करने से पहले हर इलाज की लाभ और हानि और बाद में होने वाली दिक्कतों को समझना बहुत ज़रूरी है। कभी-कभी मरीज़ की पसंद और सेहत भी इलाज को चुनने में बहुत महत्त्वपूर्ण होते हैं।

 

किडनी कैंसर के इलाज के बुनियादी लक्ष्य निम्नलिखित हैं:

ज़िन्दगी लम्बी करना।

लक्षणों को काम करना।

ज़िन्दगी की गुणवत्ता में सुधार लाना।

Posts created 29

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Begin typing your search term above and press enter to search. Press ESC to cancel.

Back To Top