लैरिन्जेल (गले का) कैंसर की स्टेजिंग और इलाज | Laryngeal Cancer Staging and Treatment in Hindi

लैरिंक्स (Larynx), जिसे वॉयस बॉक्स कहते हैं, इसमें 3 उपसमूह होते हैं: सुप्राग्लोटिस (supraglottis), ग्लोटिस (glottis) और सबग्लोटिस (subglottis)। वोकल कॉर्ड बोलने में मदद करते हैं और यह ग्लोटिस में स्थित होते हैं। लैरिंक्स गर्दन में, श्वासनली के खुलने की जगह पर ऊपर, होता है जहाँ यह खाये हुए भोजन और तरल पदार्थों को श्वासनली में आने से रोकता है।

ग्लोटिस में कैंसर का पता आमतौर पर कम स्टेज में चल जाता है क्योंकि इसमें आवाज़ में कर्कशता के लक्षण दिखने लगते हैं। ज़्यादातर लैरिन्जेल कैंसर धूम्रपान और शराब पीने से जुड़े होते हैं। लैरिन्जेल कैंसर स्टेजिंग सिस्टम का उपयोग करके ट्यूमर के आकार, सीमा, और शरीर के अंगों में फैलाव का पता किया जाता है। यह इलाज के तरीके और रोग के निदान को तय करने में मदद करता है।

लैरिन्जेल कैंसर की टीएनएम स्टेजिंग | TNM Staging of Laryngeal Cancer in Hindi

अगर संकेतों और लक्षणों के कारण ऐसा लगता है कि व्यक्ति को लैरिन्जेल कैंसर है, तो रोग के इलाज की पुष्टि करने के लिए कुछ जांच आवश्यक है।

टीएनएम (TNM) स्टेजिंग को ऑरोफरीन्जियल कैंसर में बहुत ज़्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला सिस्टम है। “T” का मतलब है “ट्यूमर का आकार”, “N” का मतलब है “लिम्फ नोड्स”, और “M” का मतलब है “मेटास्टेसिस”। T के बाद (1, 2, 3, 4a, और 4b), N के बाद (0, 1, 2, और 3) और M के बाद (0 और 1) लगने वाले नंबर और/या अक्षर इन कारकों की अधिक जानकारी देते हैं।

T स्टेजिंग (T Staging)

Tis – सीटू या कैंसर के घाव में कार्सिनोमा केवल लैरिन्जेल की सतही परत में मौजूद होता है।

T1 – ट्यूमर सुप्राग्लोटिस के एक हिस्से तक सीमित है।

T2 – ट्यूमर सुप्राग्लोटिस/ग्लोटिस के एक से अधिक अंगों में पहुँच चुका है।

T3 – ट्यूमर लैरिंक्स तक सीमित है जिसमें वोकल कॉर्ड में कोई मूवमेंट नहीं है और/या यह पोस्ट-क्रिकॉइड क्षेत्र (post-cricoid area), पैरा-ग्लॉटिक स्थान (para-glottic space), पूर्व-एपिग्लॉटिक स्थान (pre-epiglottic space), या थायरॉयड कार्टिलेज (thyroid cartilage) के अंदुरुनी हिस्से में आ चुका है।

T4a – शुरुवाती ट्यूमर पास के अंगों में आ चूका है, जैसे कि थायरॉयड कार्टिलेज (thyroid cartilage), श्वासनली (trachea), पट्टा मांसपेशियां (strap muscles), थायरॉयड (thyroid) या ग्रासनली (esophagus)।

T4b – किसी भी आकार का शुरुवाती ट्यूमर जो महत्वपूर्ण अंगों में आ चुका है, जैसे प्रीवेर्टेब्रल स्थान (prevertebral space), मीडियास्टिनल भाग (mediastinal structure), या कैरोटिड धमनी (carotid artery)।

N स्टेजिंग (N Staging)

N0 – पास के लिम्फ नोड्स में ट्यूमर नहीं फैला है।

N1 – रोग एक इप्सिलैटरल (ipsilateral) लिम्फ नोड तक फ़ैल चुका है जिसका आकार </=3 cm है।

N1 – रोग एक इप्सिलैटरल (ipsilateral) लिम्फ नोड तक फ़ैल चुका है जिसका आकार </=3 cm है

N2a – रोग एक इप्सिलैटरल (ipsilateral) लिम्फ नोड तक फ़ैल चुका है जिसका आकार >3 cm और </= 6 cm तक है

N2a – रोग एक इप्सिलैटरल (ipsilateral) लिम्फ नोड तक फ़ैल चुका है जिसका आकार >3 cm और </= 6 cm तक है

N2bकई इप्सिलैटरल (ipsilateral) नोड्स के मेटास्टेसिस, <6 cm

N2b – कई इप्सिलैटरल (ipsilateral) नोड्स के मेटास्टेसिस, <6 cm

N2cद्विपक्षीय/प्रतिपक्षी (bilateral/contralateral) लिम्फ नोड्स के मेटास्टेसिस, सभी अकार में <6 cm

2c – द्विपक्षीय/प्रतिपक्षी (bilateral/contralateral) लिम्फ नोड्स के मेटास्टेसिस, सभी अकार में <6 cm

N3 – रोग लिम्फ नोड्स तक फ़ैल चुका है जिसका आकर >6 cm या स्पष्ट एक्सट्रानॉडल (extranodal) शामिल है

N3 – रोग लिम्फ नोड्स तक फ़ैल चुका है जिसका आकर >6 cm

N3 – रोग लिम्फ नोड्स तक फ़ैल चुका है एक्सट्रानॉडल (extranodal) है

M स्टेजिंग (M Staging)

M0 – दूर के हिस्सों में कोई फैलाव नहीं हुआ है।

M1 – रोग दूर के हिस्सों में फैल गया है।

लैरिन्जेल कैंसर स्टेजिंग का संक्षिप्त विवरण | Nasopharyngeal Cancer Staging Summary

एक बार जब टी, एन, और एम कैटेगरीज़ को विभिन्न इलाज के तरीकों से तय कर लिया जाता है, इस जानकारी को बीमारी की स्टेज (0 से IV तक) को समझने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

स्टे TNM
0 Tis N0 M0
I T1 N0 M0
II T2 N0 M0
III T3 N0 M0
T1-3 N1 M0
IVA T1-3 N2 M0
T4a N0-2 M0
IVB कोई भी T N3 M0
T4b कोई भी N M0
IVC कोई भी T कोई भी N M1

 

स्टेजिंग के अनुसार लैरिन्जेल कैंसर का इलाज | Laryngeal Cancer Treatment based on Staging in Hindi

रोग की स्टेज के अलावा, इलाज चुनना आमतौर पर रोग के स्थान, रोगी की राय, रोगी की स्थिति के साथ अन्य कारकों पर निर्भर करता है। लैरिन्जेल कैंसर की विभिन्न स्टेजों के लिए बेहतर इलाज निम्नलिखित हैं, लेकिन अंतिम निर्णय रोगी के इलाज के मूल्यांकन के बाद ऑन्कोलॉजिस्ट द्वारा लिया जाता है।

स्टेज 0 (Stage 0)

स्टेज 0 कैंसर के लिए, शामिल जगह के सर्जरी करके या रेडियोथेरेपी से इलाज को बेहतर तरीका माना जाता है। रोग दुबारा होने के संकेतों के लिए इलाज के बाद रोगी को अपनी जांच करवाते रहना चाहिए।

स्टेज I और II (Stage I and II)

स्टेज I और II के कैंसर के लिए, रेडियोथेरेपी (radiotherapy) को बेहतर इलाज माना जाता है। सर्जरी करके निकालना (आंशिक लैरिंगेकटमी/partial laryngectomy) को भी प्राथमिक इलाज की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

स्टेज III और IVA (Stage III to IVA)

स्टेज III से IVA के कैंसर के लिए, निम्नलिखित 3 में से कोई भी प्राथमिक इलाज की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है:

1) सिर्फ कीमोथेरेपी के साथ इलाज शुरू करें जिसके बाद रेडिएशन थेरेपी या रेडियोथेरेपी + कीमोथेरेपी करें।

2) सर्जरी को प्राथमिक इलाज की तरह इस्तेमाल किया जाता है और इसमें प्रभावित लिम्फ नोड्स के साथ प्राथमिक ट्यूमर का निकालना भी शामिल होता है। इसके बाद रोगनिरोधी बुरे असर को हटाने के लिए रेडिएशन थेरेपी या रेडियोथेरेपी + कीमोथेरेपी दी जाती है।

3) कीमोथेरेपी + रेडियोथेरेपी या सिर्फ रेडियोथेरेपी को प्राथमिक इलाज की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। कैंसर के बचे हुए ऊतक को हटाने के लिए सर्जरी की जा सकती है।

स्टेज IVB (Stage IVB)

स्टेज IVB कैंसर के लिए, कीमोथेरेपी के साथ रेडियोथेरेपी आमतौर पर प्राथमिक इलाज की तरह दी जाती है।

स्टेज IVC (Stage IVC)

स्टेज IVC कैंसर के लिए, कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी या टार्गेटेड थेरेपी इलाज के विकल्प हैं। रेडिएशन थेरेपी को पैलिएटिव ट्रीटमेंट (दोष घटानेवाले इलाज) के रूप में दिया जा सकता है।

 

लैरिन्जेल कैंसर के इलाज के बुनियादी लक्ष्य निम्नलिखित हैं:

ज़िन्दगी लम्बी करना।

लक्षणों को काम करना।

ज़िन्दगी की गुणवत्ता में सुधार लाना।

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