लीवर कैंसर का इलाज | Liver Cancer Treatment in Hindi

लीवर कैंसर का इलाज | Liver Cancer Treatment in Hindi

अगर किसी को लिवर कैंसर होने के कोई संकेत या लक्षण दिखाई दें, तो रोग की पहचान के लिए कुछ जांच की जानी ज़रूरी हैं और इससे रोग की स्टेज जानकार इसका उचित इलाज किया जा सकता है।

लिवर कैंसर के इलाज विकल्प कई कारकों पर निर्भर करते हैं, जिसमें लिवर कैंसर का प्रकार, बीमारी की स्टेज, लिवर की स्थिति, रोगी की स्थिति, सहित अन्य कारक मौजूद है। इसमें और भी कारक शामिल हो सकते हैं।

हेपैटोसेलुलर कार्सिनोमा के इलाज विकल्प | Treatment options for hepatocellular carcinoma in Hindi

संभावित रूप से निकाले जाने वाला या ट्रांसपलट होने योग्य (Potentially resectable or transplantable)

जिन मरीज़ों में लीवर कैंसर को निकाला जा सकता है और लिवर के कार्यों को बचाया जा सकता है, सर्जरी (आंशिक हेपेटेक्टोमी) को ऐसे में बेहतर इलाज माना जाता है। जिन मरीज़ों का लिवर ट्रांसप्लांट हो सकता है, एबलेशन (Ablation) या एम्बोलाईजेशन (Embolization) जैसे इलाज को ट्रांसप्लांट के सहारे की तरह इस्तेमाक किया जा सकता है।

ना निकाला जाने योग्य (Unresectable)

जिन रोगियों को बड़ी स्टेज का केन्सर है जिसे रक्त वाहिकाओं या बड़े ट्यूमर के आकार में मौजूदगी के कारण निकाला नहीं जा सकता है, एबलेशन (Ablation) और/या एम्बोलाईजेशन (Embolization) जैसे इलाज को बेहतर माना जाता है, यह प्रवेश के स्थान और फैलाव पर निर्भर करता है। टार्गेटेड थेरेपी या कीमोथेरेपी को भी इसमें इस्तेमाल किया जा सकता है।

केवल स्थानीय बीमारी, ऑपरेशन सम्भव ना होना (Inoperable with only local disease)

कुछ मामलों में, ट्यूमर लिवर के एक हिस्से तक सीमित होता है (जिसे सर्जरी से हटाया जा सकता है) लेकिन लिवर खराब होने या ख़राब स्थिति के कारण मरीज सर्जरी नहीं करवा पाते हैं। इसीलिए, इस तरह के मामलों में एबलेशन (Ablation) या एम्बोलाईजेशन (Embolization) जैसे इलाज आमतौर पर अपनाए जाते हैं। टार्गेटेड थेरेपी या कीमोथेरेपी को भी इसमें इस्तेमाल किया जा सकता है।

मेटास्टैटिक (Metastatic)

बड़े हुए लिवर कैंसर वाले रोगियों के लिए जिनका रोग दूर शरीर के अंगों में फैल गया है, उनके लिए टार्गेटेड थेरेपी या कीमोथेरेपी को आम तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।

हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा के लिए उपयोग किए जाने वाले इलाज के तरीक़ो की जानकारी | Overview of Treatment Modalities used for Hepatocellular carcinoma

सर्जरी (Surgery)

सर्जरी (Surgery)

सर्जरी से रोग का इलाज लम्बे समय तक काम करता है और इसे ज्यादातर मामलों में लिवर कैंसर में बेहतर इलाज माना जाता है। कभी-कभी, खून बहना और दर्द जैसे लक्षणों को दूर करने के लिए सर्जरी को इस्तेमाल किया जा सकता है। लिवर कैंसर का इलाज करने के लिए निम्न प्रकार की सर्जरी का उपयोग किया जा सकता है:

इस सर्जरी में, केवल कैंसर वाले लिवर टिश्यु को थोड़ी जगह छोड़कर निकाला जाता है जिससे वाकी लिवर अपनी जगह सलामत रहता है। यह आमतौर पर प्रारंभिक स्टेज की बीमारी में इस्तेमाल किया जाता है जब ट्यूमर लिवर के एक स्थान तक सीमित है (प्रमुख रक्त वाहिकाओं को प्रभावित नहीं किया है) और जब इसके कार्य में बाधा नहीं आई है।

लिवर ट्रांसप्लांट (Liver Transplant)

लिवर ट्रांसप्लांट (Liver Transplant)

इस सर्जरी प्रक्रिया में, पूरे लिवर को हटा दिया जाता है और किसी अन्य व्यक्ति द्वारा डोनेट किए गए लिवर का ट्रांसप्लांट किया जाता है। यह आम तौर पर छोटे ट्यूमर वाले रोगियों के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाता है (या तो 5 सेमी से छोटा ट्यूमर 1 ट्यूमर या 3 सेमी के अंदर आकार वाले 2 से 3 ट्यूमर) जो खराब लिवर कार्य के साथ आसपास की मुख्य रक्त वाहिकाओं में शामिल नहीं हुए हैं। लेकिन, एक मरीज जो ट्रांसप्लांट के लिए एक अच्छा उम्मीदवार है, उसे डोनेट किए गए लिवर की उपलब्धता तक इंतजार करना पड़ सकता है, जिसमें बहुत अधिक समय लग सकता है। इसीलिए, इन रोगियों को आम तौर पर इस समय के दौरान अन्य इलाज दिए जाते हैं जो लिवर कैंसर को रोकते हैं।

एबलेशन (Ablation)

एबलेशन (Ablation)

एबलेशन ऐसी तकनीक है जिसमें ट्यूमर को शरीर से निकाले बिना ख़त्म किया जाता है। यह तकनीक आम तौर पर छोटे ट्यूमर वाले रोगियों (आमतौर पर <3 सेमी) के लिए इस्तेमाल की जाती है जब ट्यूमर के स्थान, रोगी की स्थिति, आदि के कारण सर्जरी विकल्प नहीं होती है। एबलेशन (Ablation) आस-पास के कुछ टिश्यु के साथ कैंसर सेल को नष्ट कर सकता है, और इसलिए, इसका इस्तेमाल रक्त वाहिका या महत्वपूर्ण संरचनाओं पर हमला करने वाले ट्यूमर के इलाज के लिए नहीं किया जाता है।  रेडियोफ्रीक्वेंसी एबलेशन (RFA) में उच्च-ऊर्जा रेडियो वेव इस्तेमाल की जाती है, माइक्रोवेव एबलेशन (MWA) तकनीक में माइक्रोवेव इस्तेमाल की जाती है, जबकि ट्यूमर को ख़त्म करने के लिए क्रायोब्लेक्शन (cryoablation) में बहुत ठंडी गैसें इस्तेमाल होतीं हैं। लक्षित ट्यूमर का सटीक पता लगाने के लिए इन एबलेशन तकनीकों के साथ इमेजिंग तकनीकों को इस्तेमाल किया जाता है।

एम्बोलाईजेशन (Embolization)

एम्बोलाईजेशन (Embolization)

इस तकनीक में, अक्रिय छोटे कणों (कीमो-एम्बोलाईजेशन में कणों में दवाएँ होती हैं और रेडियो-एम्बोलाईजेशन में इसमें रेडियोधर्मी पदार्थ डाला जाता है)  की मदद से केन्सर सेल तक खून की आपूर्ति रोककर लिवर कैंसर को मारा जाता है जिसे कैंसर सेल को रक्त की आपूर्ति करने वाली धमनी में सीधे डाला जाता है।

यह तकनीक आम तौर पर उन रोगियों को दी जाती है जो सर्जरी नहीं करवा सकते और लिवर ट्रांसप्लांट का इंतेज़ार कर रहे हैं। बड़े ट्यूमर (>5 सेमी) के लिए एम्बोलाईजेशन को इस्तेमाल किया जा सकता है और इसे एबलेशन के साथ जोड़कर भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

कीमोथेरेपी (Chemotherapy)

कीमोथेरेपी कैंसर विरोधी दवा से किया जाने वाला इलाज है जिससे तेज़ी से बढ़ने वाले कैंसर सेल को मारा या कम किया जाता है। यह लिवर कैंसर के इलाज में बहुत काम नहीं करता है और आमतौर पर इसके इलाज के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

पैलिएटिव ट्रीटमेंट (Palliative Treatment)

इससे लिवर कैंसर के लक्षणों में राहत देकर ज़िन्दगी की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिल सकती है। लेकिन, वह सीधे तौर पर लिवर कैंसर का इलाज नहीं करते हैं। उन्हें बड़ी स्टेज के कैंसर में सहायक देख-भाल के लिए दिया जाता है। इसमें दवाएं शामिल हैं जिससे दर्द और लक्षणों को कम किया जा सकता है जैसे उल्टी, थकान या खून बहने या दर्द आदि के लिए एक्सटर्नल-बीम रेडिएशन थेरेपी दी जा सकती है। इसके और भी कई तरह के उपयोग हो सकते हैं।

इलाज का फैसला करने से पहले हर इलाज की लाभ और हानि और बाद में होने वाली दिक्कतों को समझना बहुत ज़रूरी है। कभी-कभी मरीज़ की पसंद और सेहत भी इलाज को चुनने में बहुत महत्त्वपूर्ण होते हैं।

 

लिवर कैंसर के इलाज के बुनियादी लक्ष्य निम्नलिखित हैं:

ज़िन्दगी लम्बी करना।

लक्षणों को काम करना।

ज़िन्दगी की गुणवत्ता में सुधार लाना।

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