लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) का इलाज | Lung Cancer Treatment in Hindi

लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) का इलाज | Lung Cancer Treatment in Hindi

अगर संकेतों और लक्षणों के कारण व्यक्ति को फेफड़े का कैंसर है, तो रोग के इलाज की जांच करने में और उपयुक्त इलाज विकल्प चुनने में टीएनएम स्टेजिंग से मदद मिल सकती है।

फेफड़ों के कैंसर के दो प्रकार हैं, नॉन स्मॉल सेल लंग कैंसर (Non Small Cell Lung Cancer) और स्मॉल सेल लंग कैंसर (Small Cell Lung Cancer)। दोनों के इलाज बिल्कुल है। हम नीचे इसकी विस्तार से चर्चा करेंगे।

फेफड़े के कैंसर के प्रकार | Lung Cancer Types in Hindi

नॉन स्मॉल सेल लंग कैंसर का इलाज (Treatment of Non Small Cell Lung Cancer in Hindi)

NSCLC का इलाज मुख्य रूप से स्टेज, प्रकार, ट्यूमर का स्थान, फुफ्फुसीय फ़ंक्शन, रोगी की स्थिति, कुछ आनुवंशिक असामान्यताओं की उपस्थिति, और अन्य कारकों पर निर्भर करता है।

NSCLC की विभिन्न स्टेजों के बेहतर इलाज निम्नलिखित हैं, लेकिन अंतिम निर्णय रोगी के इलाज के मूल्यांकन के बाद ऑन्कोलॉजिस्ट द्वारा लिया जाता है।

स्टेज के अनुसार फेफड़े के कैंसर के इलाज विकल्प (Lung Cancer Treatment Options according to stage in Hindi)

स्टेज 0 (Stage I)

स्टेज 0 NSCLC वायुमार्ग की सतही परत तक सीमित है और मुख्य उपचार के रूप में सिर्फ़ सर्जरी करके इसका इलाज किया जा सकता है। कभी-कभी, फोटोडेनामिक थेरेपी (PDT), लेजर थेरेपी, या ब्रैकीथेरेपी जैसी एंडोब्रोनियल थेरेपी को स्टेज 0 NSCLC के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

स्टेज I (Stage I)

मीडियास्टिनल लिम्फ नोड अलग करने के साथ सर्जरी से निकालना बेहतर इलाज है। कुछ मामलों में कीमोथेरेपी भी जोड़ी जा सकती है। जिन मामलों में ऑपरेशन नहीं हो सकता (खराब फेफड़े, खराब स्थिति, आदि), रेडिएशन थेरेपी को प्राथमिक इलाज की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

स्टेज II (Stage II)

मिडियास्टिनल लिम्फ नोड अलग करने के साथ सर्जरी से निकाला जाता है, और कुछ मामलों में प्रीऑपरेटिव कीमोरेडिएशन पर विचार किया जा सकता है। सर्जरी के बाद कीमोथेरेपी पर विचार किया जाना चाहिए। जिन मामलों में ऑपरेशन नहीं हो सकता, कीमोथेरेपी और/या रेडियोथेरेपी दी जा सकती है।

स्टेज III (Stage III)

स्टेज III NSCLC इलाज में आमतौर पर सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी और कीमोथेरेपी सम्मिलित होतीं हैं। इसके इलाज का फैलसा ट्यूमर के आकार और स्थान, लिम्फ नोड होने के स्थान और रोगी की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।

स्टेज IV (Stage IV)

कीमोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी या इम्यूनोथेरेपी को प्राथमिक इलाज माना जाता है। अन्य इलाज विकल्प जैसे सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी या बोन-डायरेक्टेड थेरेपी को लक्षणों को कम करने या राहत देने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

तो इससे हम फेफड़े के कैंसर के इलाज के अंत में आते हैं। अब फेफड़ों के कैंसर के विभिन्न इलाज के तरीक़ों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

NSCLC के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले विभिन्न इलाज के तरीकों का संक्षिप्त विवरण (Brief description of various treatment modalities employed for NSCLC in Hindi)

सर्जरी (Surgery)

सर्जरी (Surgery)

 

सर्जरी उन स्थितियों में बेहतर उपचार है जब माँसपेशी-घातक और कुछ उच्च स्तर के फेफड़े के कैंसर शरीर के दूर के हिस्सों में नहीं फैले हैं और उन्हें पूरी तरह से हटाया जा सकता है। शुरूवाती स्टेज की बीमारी के लिए, ट्यूमर को सेग्मेंटेक्टॉमी, कील का निकालना(wedge resection), या सलीव निकालने से हटाया जा सकता है, जहां प्रभावित लोब का केवल एक हिस्सा हटा दिया जाता है। बड़ी स्टेज की बीमारी के मामले में, ट्यूमर के आकार और स्थान के आधार पर लोबेक्टॉमी/lobectomy या न्यूमोनेक्टॉमी/pneumonectomy (पूरे फेफड़े को सर्जरी करके निकालना) की ज़रूरत हो सकती है।

बड़ी स्टेज की बीमारी के बढ़ते ट्यूमर द्वारा वायुमार्ग की रुकावट को दूर करने के लिए सर्जरी को पैलिएटिव ट्रीटमेंट (दोष घटानेवाला इलाज) की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

रेडिएशन थेरेपी (Radiation Therapy)

रेडिएशन थेरेपी (Radiation Therapy)

 

रेडिएशन थेरेपी (या रेडियोथेरेपी) में तेज़ ऊर्जा विकिरण का इस्तेमाल होता है जिसे कैंसर सेल को मारने के लिए उनपर सीधा डाला जाता है। इसे बाहरी रेडिएशन साधन (बाहरी बीम रेडिएशन थेरेपी) से किया जा सकता है या रेडिएशन साधन को कैंसर ऊतकों के पास (ब्रैकीथेरेपी) रखा जा सकता है।

कीमोथेरेपी (Chemotherapy)

कीमोथेरेपी (Chemotherapy)

कीमोथेरेपी कैंसर विरोधी दवा से किया जाने वाला इलाज है जिससे तेज़ी से बढ़ने वाले कैंसर सेल को मारा या काम किया जाता है। इसे आगे की स्टेज वाली रोग के लिए मुख्य इलाज माना जाता है जब बिमारी पास के भागों में भी पहुँच गयी हो। चिकित्सक

की राय और मरीज़ की हालत के अनुसार, इसके साथ अन्य इलाज भी जोड़े जा सकते हैं जिससे इलाज का लाभ जल्दी मिल सके। इसका इस्तेमाल नवसहायक/neoadjuvant (सर्जरी से पहले), सहायक (सर्जरी के बाद) और पैलिएटिव ट्रीटमेंट (दोष घटानेवाला इलाज) (मेटास्टेटिक रोग) सेटिंग्स में किया जा सकता है। इसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं जैसे जी-मचलाना/उलटी, बाल झड़ना, थकान, सेल की कमी, आदि। यह इसीलिए है क्योंकि यह इलाज कैंसर से सेल के अलावा सामान्य सेल पर भी अपना असर छोड़ता है।

टार्गेटेड थेरेपी (Targeted Therapy)

टार्गेटेड थेरेपी (Targeted Therapy)

टार्गेटेड दवाओं को फेफड़े के कैंसर सेल के विशिष्ट जीन या प्रोटीन को देखकर बनाया जाता है। नैदानिक तकनीकों में प्रगति के साथ, फेफड़े के कैंसर के लिए आनुवंशिक असामान्यताएं सामने आईं हैं जिन्हें टार्गेटेड दवाओं की मदद से ठीक किया जा सकता है। टार्गेटेड दवा थेरेपी को पारंपरिक साइटोटोक्सिक (cytotoxic) कीमोथेरेपी के मुकाबले अपनी बेहतर प्रभावकारिता और सुरक्षा के कारण बड़ी स्टेज के फेफड़े के कैंसर के लिए बेहतर इलाज माना गया है।

 

NSCLC के इलाज के लिए विभिन्न टार्गेटेड दवाएं निम्नलिखित हैं:

बेवसिज़ुमाब (Bevacizumab)

बेवसिज़ुमाब (Bevacizumab)

 

जिन्हें ना निकाला जा सके, स्थानीय रूप से बड़े हुए, बारम्बार होनेवाले, या मेटास्टेटिक गैर-स्क्वैमस NSCLC और हेमोप्टीसिस के बिना किसी इतिहास वाले रोगियों के इलाज के लिए स्वीकृत किया गया है। यह गैर-स्क्वैमस NSCLC और ALK/ROS1 पुनर्व्यवस्थाओं की नकारात्मक या अज्ञात स्थिति, संवेदनशील EGFR म्यूटेशन स्थिति, और PD-L1 की <50% मौजूदगी वाले रोगियों के इलाज के लिए कीमोथेरेपी के साथ भी दिया जा सकता है।

रम्यूनिक्रुमाब (Ramucirumab)

रम्यूनिक्रुमाब (Ramucirumab)

 

कीमोथेरेपी के साथ जोड़कर, यह मेटास्टैटिक NSCLC के साथ उन रोगियों के इलाज के लिए स्वीकृत है जिनकी बीमारी पहली स्तर की प्लैटिनम-आधारित कीमोथेरेपी से या उसके बाद बढ़ी है।

गेफिटिनिब (Gefitinib) और ऐर्लोटिनिब (Erlotinib)

ऐर्लोटिनिब (Erlotinib)

 

गेफिटिनिब और ऐर्लोटिनिब दोनों को स्थानीय रूप से बढ़े हुए, बार-बार होने वाले, या मेटास्टेटिक गैर-स्क्वैमस NSCLC रोगियों, जिनको सक्रिय संवेदक EGFR म्यूटेशन है, के लिए प्राथमिक इलाज के रूप में स्वीकृत किया गया है।

आफ़तिनीब (Afatinib)

आफ़तिनीब (Afatinib)

 

यह एक EGFR और HER2 अवरोधक है जो मेटास्टैटिक NSCLC वाले रोगियों, जिनको सक्रिय संवेदक EGFR म्यूटेशन है, के लिए प्राथमिक इलाज के रूप में स्वीकृत किया गया है। आफ़तिनीब के साथ इलाज उन रोगियों के लिए जारी रखा जा सकता है जो पहले प्राथमिक इलाज से आगे बढ़ चुके हैं और जिनके कई रोगसूचक घाव नहीं हैं।

ओसिमार्टिनिब (Osimertinib)

ओसिमार्टिनिब (Osimertinib)

यह एक EGFR और T790M अवरोधक है  जो स्थानीय रूप से बढ़े हुए या मेटास्टैटिक NSCLC वाले रोगियों, जिनको सक्रिय संवेदक EGFR म्यूटेशन है, के लिए प्राथमिक इलाज के रूप में स्वीकृत किया गया है। ओसिमार्टिनिब के साथ इलाज उन रोगियों के लिए जारी रखा जा सकता है जो पहले प्राथमिक इलाज से आगे बढ़ चुके हैं और जिनके कई रोगसूचक घाव (रोगसूचक मस्तिष्क मेटास्टेस को छोड़कर) नहीं हैं। यह मेटास्टैटिक EGFR और टी T790M-पॉजिटिव NSCLC वाले मरीजों के लिए बाद की थेरेपी के रूप में भी स्वीकृत है, जो ऐर्लोटिनिब (Erlotinib), गेफिटिनिब (Gefitinib), या Afatinib (आफ़तिनीब) तक पहुँच चुके हैं।

क्रिज़ोटिनिब (Crizotinib)

क्रिज़ोटिनिब (Crizotinib)

यह एक ALK और ROS1 अवरोधक है जिसे स्थानीय रूप से बड़े हुए, मेटास्टेटिक (मस्तिष्क मेटास्टेस सहित), ALK और/या ROS1 रीअरेंजमेंट-पॉज़िटिव NSCLC वाले रोगियों के लिए स्वीकृत किया गया है। क्रिज़ोटिनिब के साथ इलाज ALK रीअरेंजमेंट वाले उन रोगियों के लिए जारी रखा जा सकता है जो पहले प्राथमिक इलाज से आगे बढ़ चुके हैं और जिनके कई रोगसूचक घाव नहीं हैं।

सेरटिनीब (Ceritinib)

सेरटिनीब (Ceritinib)

यह एक ALK और ROS1 अवरोधक है जिसे स्थानीय रूप से बड़े हुए, मेटास्टेटिक, ALK और/या ROS1 रीअरेंजमेंट-पॉज़िटिव NSCLC वाले रोगियों के लिए स्वीकृत किया गया है जो सेरटिनीब को सहन नहीं कर सकते या जिनकी सेरटिनीब इलाज से स्थिति बढ़ गई है।

अलेकटीनिब (Alectinib)

अलेकटीनिब (Alectinib)

यह एक ALK और MET अवरोधक है जिसे स्थानीय रूप से बड़े हुए, मेटास्टेटिक (मस्तिष्क मेटास्टेस सहित), ALK और/या ROS1 रीअरेंजमेंट-पॉज़िटिव NSCLC वाले रोगियों के लिए स्वीकृत किया गया है। इसे मेटास्टैटिक, ALK-पॉजिटिव NSCLC वाले उन रोगियों के इलाज के लिए भी स्वीकृत किया गया है जो सेरटिनीब को सहन नहीं कर सकते या जिनकी सेरटिनीब इलाज से स्थिति बढ़ गई है।

ब्रिंगाटिनिब (Brigatinib)

ब्रिंगाटिनिब (Brigatinib)

यह एक ALK अवरोधक है जिसे मेटास्टैटिक, ALK-पॉजिटिव NSCLC वाले उन रोगियों के इलाज के लिए स्वीकृत किया गया है जो सेरटिनीब को सहन नहीं कर सकते या जिनकी सेरटिनीब इलाज से स्थिति बढ़ गई है।

Dabrafenib (डाबरफेनीब)  + ट्रामेटीनिब (Trametinib)

डाबरफेनीब + ट्रामेटीनिब जोड़ मेटास्टैटिक, BRAF V600E पॉजिटिव NSCLC वाले रोगियों के उपचार के लिए स्वीकृत किया गया है। डाबरफेनीब के साथ सिंगल-एजेंट थेरेपी मेटास्टेटिक, BRAF V600E-पॉजिटिव NSCLC वाले मरीजों को भी दी जा सकती है जो कॉम्बिनेशन थेरेपी को बर्दाश्त नहीं कर सकते।

इम्यूनोथेरेपी (Immunotherapy)

इम्यूनोथेरेपी (Immunotherapy)

रोगी प्रतिरक्षा प्रणाली से बचने के लिए कैंसर सेल इन सेल पर हमले से बचने के लिए कुछ तंत्र का उपयोग करती हैं। इम्यून चेकपॉइंट अवरोधकों ने हाल के दिनों में बहुत ध्यान आकर्षित किया है। स्वस्थ सेल पर मौजूद इम्यून सेल की सतह के प्रोटीन को इम्यून चेकपॉइंट कहते हैं और टी-सेल जो स्वस्थ सेक को टी-सेल के हमले से बचाते हैं, जिन्हें प्रतिरक्षा प्रणाली के सिपाही भी कह सकते हैं। सक्रिय टी-सेल PD-1 छोड़ता है, जो एक रिसेप्टर है जो अलग लिगैंड के साथ जोड़ता है जिसमें PD-L1, PD-L2, और स्वस्थ सेल पर मौजूद समान लिगेंड शामिल हैं।

ऐसा बंधन टी-सेल को स्वस्थ सेल पर हमला करने से रोकता है। कैंसर सेल इस तंत्र का लाभ उठाते हैं और प्रतिरक्षा प्रणाली के हमले से बचने के लिए PD-L1, PDL2 और उनकी सतह पर मौजूद दूसरे चेकपॉइंट से जुड़ते हैं। प्रतिरक्षा चेकपॉइंट अवरोधक सतह के प्रोटीन PD-1/L-1 को रोकते हैं और कैंसर सेल को पहचानने और मारने के लिए टी-सेल से अलग हो जाते हैं।

निवोलूमैब (Nivolumab)

निवोलूमैब (Nivolumab)

इसमें बड़ी-स्टेज के मेटास्टैटिक स्क्वैमस NSCLC और गैर-स्क्वैमस NSCLC वाले रोगियों का इलाज होता है जिन्हें मानक प्लैटिनम-आधारित कीमोथेरेपी (ट्यूमर PD-L1 प्रोटीन के बावजूद) के दौरान या उसके बाद रोग बढ़ने का अनुभव हुआ है।

पेमब्रोलाइज़ुमैब (Pembrolizumab)

पेमब्रोलाइज़ुमैब (Pembrolizumab)

एपिडर्मल ग्रोथ फैक्टर रिसेप्टर (EGFR) म्यूटेशन, एनाप्लास्टिक लिम्फोमा किनसे (ALK) का दुबारा होना, BRAF V600E म्यूटेशन, या ROS1 दुबारा होने वाले और >/=50% PD-L1 की मौजूदगी वाले बड़ी स्टेज के NSCLC वाले मरीजों के लिए यह प्राथमिक इलाज है। PD-L1 मौजूदगी वाले रोगी जो <50% लेकिन >1% हैं, उनके लिए इसे प्राथमिक इलाज की तरह कीमोथेरेपी के साथ जोड़ा जा सकता है। मेटास्टेटिक गैर-स्क्वैमस या स्क्वैमस NSCLC और PD-L1 मौजूदगी का स्तर >/=1% के साथ रोगियों का बाद में इलाज किया जा सकता है।

एटीज़ोलिज़ुमाब (Atezolizumab)

एटीज़ोलिज़ुमाब (Atezolizumab)

इसे कीमोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी के साथ जोड़ा जाता है, एटीज़ोलिज़ुमाब मेटास्टेटिक गैर-स्क्वैमस NSCLC और NSCLC मौजूदगी <50% या अज्ञात वाले रोगियों को प्राथमिक इलाज के रूप में दिया जा सकता है। मेटास्टेटिक गैर-स्क्वैमस या स्क्वैमस NSCLC और PD-L1 मौजूदगी का स्तर >/=1% के साथ रोगियों का बाद में इलाज किया जा सकता है।

ड्यूरवेलुमाब (Durvalumab)

ड्यूरवेलुमाब (Durvalumab)

यह उन रोगियों के लिए बेहतर इलाज माना जाता है, जो बिना निकाली जाने वाली स्टेज III NSCLC के लिए चलते रसायन (chemoradiation) इलाज के बाद बदतर नहीं हुए हैं।

 

पैलिएटिव ट्रीटमेंट (Palliative Treatment)

इन इलाजों से रोग से होने वाली दिक्कतों में राहत और लक्षणों में राहत मिलती है जिससे ज़िन्दगी की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिल सकती है।

इसे आम तौर पर राहत के लिए दिया जाता है और इसमें दवाएं शामिल हैं जिससे दर्द और लक्षणों को कम किया जा सकता है जैसे उलटी, थकान या खून बहने या दर्द आदि के लिए एक्सटर्नल-बीम रेडिएशन थेरेपी, सर्जरी, फोटोडायनामिक थेरेपी, लेजर थेरेपी, रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन, वायुमार्ग की बाधा को कम करने के लिए स्टेंट रखना या दर्द और अन्य लक्षणों को कम करने के लिए दवाओं का उपयोग किया जा सकता है।

 

स्मॉल सेल लंग कैंसर का इलाज (Treatment of Small Cell Lung Cancer/SCLC in Hindi)

NSCLC की तरह, SCLC का इलाज जांच की मदद से पता हुई बीमारी की स्टेज पर निर्भर करता है।

बहुत कम रोगियों का पता स्टेज I SCLC पर चलता है, जिन्हें सर्जरी के लिए उम्मीदवार माना जा सकता है। इसीलिए, रेडियोथेरेपी के साथ या बिना कीमोथेरेपी का इलाज प्राथमिक आधार बना रहता है।

SCLC की विभिन्न स्टेजों के लिए इलाज | Treatment approaches for different stages of SCLC

सीमित स्टेज (Limited stage)

सीमित स्टेज SCLC के लिए रेडियोथेरेपी के साथ या बिना कीमोथेरेपी को बेहतर इलाज माना जाता है। सर्जरी को प्रारंभिक बीमारी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन रेडियोथेरेपी के साथ या बिना कीमोथेरेपी को आम तौर पर सर्जरी के बाद कहा जाता है क्योंकि SCLC के फिर से होने की दर बहुत ज़्यादा है। फ़िज़िशन की राय के अनुसार रोग को मस्तिष्क में फैलने से रोकने के लिए प्रोफ़िलेक्टिक क्रेनीयल इरेडीएशन को भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

व्यापक स्टेज (Extensive stage)

व्यापक स्टेज SCLC के लिए रेडियोथेरेपी के साथ या बिना कीमोथेरेपी को बेहतर इलाज माना जाता है। रेडिएशन थेरेपी आमतौर पर कीमोथेरेपी से सीधे लाभान्वित नहीं होने वाले दूर के अंगों में फैलने वाली बीमारी के लिए इस्तेमाल होती है।

फ़िज़िशन की राय के अनुसार रोग को मस्तिष्क में फैलने से रोकने के लिए प्रोफ़िलेक्टिक क्रेनीयल इरेडीएशन को भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

SCLC के लिए इस्तेमाल किए गए विभिन्न इलाज के तरीक़ों का संक्षिप्त विवरण | Brief description of various treatment modalities employed for SCLC in Hindi

कीमोथेरेपी (Chemotherapy)

कीमोथेरेपी कैंसर विरोधी दवा से किया जाने वाला इलाज है जिससे तेज़ी से बढ़ने वाले कैंसर सेल को मारा या काम किया जाता है। इसे SCLC के लिए मुख्य इलाज माना जाता है। इसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं जैसे जी-मचलाना/उलटी, बाल झड़ना, थकान, सेल की कमी, आदि। यह इसीलिए है क्योंकि यह इलाज कैंसर से सेल के अलावा सामान्य सेल पर भी अपना असर छोड़ता है।

रेडिएशन थेरेपी (Radiation Therapy)

SCLC के इलाज के लिए रेडीयोथेरेपी को आम तौर पर कीमोथेरेपी के साथ जोड़ा जाता है। मस्तिष्क सहित दूर के शरीर के अंगों में फैलने वाले कैंसर के इलाज के लिए भी रेडियोथेरेपी अपनाई जाती है।

जैसे आगे की स्टेज के रोग की सर्जरी और/या कीमोथेरेपी। कभी-कभी, इसे दोष घटानेवाले इलाज की तरह इस्तेमाल में लाया जाता है जैसे दर्द रोकना, खून का बहना कम करना, और आगे की स्टेज से जुडी दिक्कतों को रोकना।

पूरे मस्तिष्क की रेडिएशन थेरेपी आमतौर पर उन रोगियों को दी जाती है जिनका रोग मस्तिष्क में फैल गया है या उन मरीज़ों को जिनको रोग के मस्तिष्क में फैलने का ज़्यादा ख़तरा है। रेडियोथेरेपी का इस्तेमाल रोग के लक्षणों को कम करने के लिए भी किया जाता है जैसे दर्द रोकना, खून का बहना कम करना, और आगे की स्टेज से जुडी दिक्कतों को रोकना।

पैलिएटिव ट्रीटमेंट (Palliative Treatment)

इससे फेफड़े के कैंसर के लक्षणों में रहत देकर ज़िन्दगी की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिल सकती है। उन्हें बड़ी स्टेज के कैंसर में सहायक देख-भाल के लिए दिया जाता है। इसमें दवाएं शामिल हैं जिससे दर्द और लक्षणों को कम किया जा सकता है जैसे उलटी, थकान या खून बहने या दर्द आदि के लिए एक्सटर्नल-बीम रेडिएशन थेरेपी दी जा सकती है। इसके और भी कई तरह के उपयोग हो सकते हैं।

इलाज का फैसला करने से पहले हर इलाज की लाभ और हानि और बाद में होने वाली दिक्कतों को समझना बहुत ज़रूरी है। कभी-कभी मरीज़ की पसंद और सेहत भी इलाज को चुनने में बहुत महत्त्वपूर्ण होते हैं।

 

फेफड़े के कैंसर के इलाज के बुनियादी लक्ष्य निम्नलिखित हैं:

ज़िन्दगी लम्बी करना।

लक्षणों को काम करना।

ज़िन्दगी की गुणवत्ता में सुधार लाना।

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