मल्टीपल मायलोमा का इलाज | Multiple Myeloma Treatment in Hindi

अगर किसी को मल्टीपल मायलोमा होने के कोई संकेत या लक्षण दिखाई दें, तो रोग की पहचान के लिए कुछ जांच की जानी ज़रूरी हैं और इससे रोग की स्टेज जानकार इसका उचित इलाज किया जा सकता है।

प्लाज्मा सेल डिस्क्रेशिया का इलाज कई बातों पर निर्भर करता है जैसे प्लाज्मा सेल डिस्क्रेशिया का प्रकार, रोग की स्टेज, रोगी की हालत, कोमोर्बिडिटीज़ (comorbidities), रोगी की पसंद और अन्य कारक। इसके और भी कारक हो सकते हैं।

विभिन्न प्लाज्मा सेल विकारों के लिए प्राथमिक इलाज निम्नलिखित हैं, लेकिन अंतिम निर्णय ऑन्कोलॉजिस्ट द्वारा रोगी के नैदानिक मूल्यांकन के बाद लिया जाता है।

प्लाज्मा सेल डिस्क्रेशिया के इलाज विकल्प | Plasma Cell Dyscrasias Treatment Options in Hindi

एकल प्लास्मेसीटोमा/solitary plasmacytoma

रेडिएशन थेरेपी एकल प्लास्मेसीटोमा के लिए प्राथमिक इलाज है। एक्स्ट्रामेडुलरी प्लास्मेसीटोमा/extramedullary plasmacytoma होने के मामले में, रेडिएशन थेरेपी के बाद प्रभावित नरम ऊतक/soft tissue को सर्जरी से निकाला जाता है।

MGUS

MGUS रोगियों को इलाज के बिना ध्यान से देख-रेख की सलाह दी जाती है। MGUS के केवल लगभग 1% रोगियों में मायलोमा की प्रति वर्ष प्रगति होती है।

कई सुलगते मायलोमा/Smoldering multiple myeloma

कई सुलगते मायलोमा/Smoldering multiple myeloma वाले रोगी को भी इलाज के बिना ध्यान से देख-रेख की सलाह दी जाती है। रोग की प्रगति के कोई संकेत दिखने पर, कीमोथेरेपी को प्राथमिक इलाज की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है

मल्टीपल मायलोमा/Multiple myeloma

लक्षण दिखने वाले रोग/symptomatic disease के रोगियों का इंडक्शन थेरेपी से इलाज करने की राय दी जाती है जिसमें बहुपद रेजीमेंट/multiagent regimen (ज्यादातर कॉर्टिकोस्टेरॉइड/corticosteroid, इम्युनोमोडायलेटरी/immunomodulatory दवा और प्रोटियासम इनहिबिटर/proteasome inhibitor का संयोजन) शामिल होता है।

इंडक्शन थेरेपी पूरी होने के बाद, जिन रोगियों को स्टेम सेल ट्रांसप्लांट दिया जा सकता है, अगर कोई ऐसा संकेत दिखे, तो उन्हें इस प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है।

कुछ रोगियों में इंडक्शन के बाद रखरखाव इलाज/Maintenance treatment देने की ज़रूरत हो सकती है।

मल्टीपल मायलोमा के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले विभिन्न इलाज | Various Treatment options for Multiple Myeloma

कीमोथेरेपी (Chemotherapy)

कीमोथेरेपी (Chemotherapy)

 

कीमोथेरेपी कैंसर विरोधी दवा से किया जाने वाला इलाज है जिससे तेज़ी से बढ़ने वाले कैंसर सेल को मारा या कम किया जाता है। कीमोथेरेपी कई मायलोमा के प्रबंधन के लिए अन्य चिकित्सीय एजेंटों के साथ जोड़कर दी जाती है। चिकित्सक की राय और रोगी की स्थिति के आधार पर, लाभ में तेजी लाने के लिए इसे इम्युनोमोडायलेटरी/immunomodulatory दवाओं और कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स/corticosteroids के साथ भी जोड़ा जा सकता है। इसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं जैसे जी-मचलाना/उलटी, बाल झड़ना, थकान, सेल की कमी/cytopenias, आदि। यह इसीलिए है क्योंकि यह इलाज कैंसर सेल के अलावा सामान्य सेल पर भी अपना असर छोड़ता है।

कॉरटिकोस्टेराय्ड (Corticosteroids)

कॉरटिकोस्टेराय्ड (Corticosteroids)

 

यह उन दवाओं की श्रेणी है जो संरचनात्मक रूप से कोर्टिसोन/cortisone जैसे हैं, जो एड्रेनल कोर्टेक्स (adrenal cortex) द्वारा बनाये गए हार्मोन हैं। कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स/corticosteroids के उदाहरणों में डेक्सामेथासोन/dexamethasone और प्रेडनिसोन/prednisone शामिल होते हैं जो आमतौर पर मल्टीपल मायलोमा/multiple myeloma के इलाज में इस्तेमाल होते हैं। इन दवाओं के अपने दुष्प्रभाव हो सकते हैं जैसे रक्तशर्करा/hyperglycemia, वजन बढ़ना, मूड में बदलाव, हड्डियों में कमजोरी आदि। MM के इलाज में इम्यूनोमॉड्यूलेटरी/Immunomodulatory दवाएँ। MM के इलाज में इम्यूनोमॉड्यूलेटरी/Immunomodulatory दवाओं का काम?

बिसफ़ॉस्फ़ोनेट (Bisphosphonates)

बिसफ़ॉस्फ़ोनेट (Bisphosphonates)

 

बिसफ़ॉस्फ़ोनेट्स (जैसे ज़ोलेड्रोनिक (Zoledronic) एसिड, पीमिड्रोनिक(Pamidronic), आदि) ऐसी दवा हैं जो हड्डी के घनत्व को बनाए रखने में मदद करती हैं और कंकाल संबंधी दिक्कातों/skeletal-related events को कम करतीं है। आम तौर पर, हड्डियाँ दो प्रकार के हड्डी सेल से बदलती है: ओस्टियोब्लास्ट्स/osteoblasts (वह हड्डियों के घनत्व को बढ़ाते हैं) और ऑस्टियोक्लास्ट्स/osteoclasts (वह हड्डियों के घनत्व को कम करते हैं)।

बिसफ़ॉस्फ़ोनेट्स/Bisphosphonates उनमें एपोप्टोसिस/apoptosis (प्राकृतिक कोशिका का खात्मा) को जगाकर ऑस्टियोक्लास्ट्स/osteoclasts की गति कम करते हैं, और इस प्रकार, हड्डी के घनत्व को बनाए रखने और हड्डी मेटास्टेसिस/bone metastasis के लक्षणों को दूर करने में मदद करते हैं।

रेडिएशन थेरेपी (Radiation Therapy)

रेडिएशन थेरेपी (Radiation Therapy)

 

रेडिएशन थेरेपी (या रेडीयोथेरेपी) में तेज़ ऊर्जा एक्स-रे या अन्य तेज़ विकिरण का इस्तेमाल होता है जिसे कैंसर सेल को मारने के लिए उनपर सीधा डाला जाता है।

मल्टीपल मायलोमा के इलाज के लिए, एक्स्टर्नल रेडीएशन सोर्स/external radiation source (एक्स्टर्नल बीम रेडीएशन थेरेपी/external beam radiation therapy) आमतौर पर इस्तेमाल की जाती है, जब भी ऐसा संकेत मिलता है। रेडियोथेरेपी का इस्तेमाल ज्यादातर एकल प्लास्मेसीटोमा/solitary plasmacytoma के इलाज के लिए किया जाता है या दर्द, सूजन, या रीढ़ की हड्डी के सिकुड़ने जैसे बड़ी स्टेज की बीमारी के लक्षणों के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

सर्जरी (Surgery)

मल्टीपल मायलोमा के इलाज के लिए सर्जरी को बहुत कभी-कभी इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसे विशेष रूप से एकल प्लास्मेसीटोमा/solitary plasmacytoma के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है जो कि नरम ऊतक/soft tissue को प्रभावित कर रहा है, जैसे, साइनस तक जाने वाला टिशू।

स्टेम सेल ट्रांसप्लांट/Stem Cell Transplant (SCT)

स्टेम सेल ट्रांसप्लांट/Stem Cell Transplant (SCT)

SCT आमतौर पर उन रोगियों में मल्टीपल मायलोमा के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो SCT (अच्छे स्वास्थ्य वाले कम उम्र के रोगी) करवा सकते हैं और जिनमें ऐसा करने का संकेत है।

ऑटोलॉगस (Autologous) SCT

इस तकनीक में, रोगी के अपने स्टेम सेल/stem cells को पहले अस्थि मज्जा ऊतक/bone marrow tissue या परिधीय रक्त/peripheral blood (पसंद किया जाता है) से एकत्र किया जाता है। फिर, लिंफोमा सेल/lymphoma cells को मारने के लिए रोगी को तेज़-खुराक की कीमोथेरेपी दी जाती है।

इकठ्ठा किये गए स्टेम सेल/stem cells रोगी को फिर से दिए जाते हैं जो धीरे-धीरे रोगी के शरीर में रक्त सेल भरते/replenish हैं। कभी-कभी, पहले SCT के 6 से 12 महीने बाद दूसरा ऑटोलॉगस (Autologous) SCT दिया जाता है। इसे टेंडेम/Tandem SCT के नाम से जाना जाता है।

विभिन्न शोध अध्ययनों से पता चला है कि कुछ चुनिंदा रोगियों में टैंडेम/Tandem SCT किसी एकल SCT से ज़्यादा फायदेमंद हो सकता है।

एलोजेनिक (Allogeneic) SCT

इस तकनीक में, तेज़ खुराक की कीमोथेरेपी के बाद रोगी को दी जाने वाले स्वस्थ स्टेम सेल को डोनर के रूप में अन्य व्यक्ति से प्राप्त किया जाता है।

यह बहुत महत्वपूर्ण है कि डोनर करीबी खून का रिश्तेदार (भाई बेहतर होगा) है ताकि डोनर सेल रोगी के सेल से मेल खा सके। इसमें ग्राफ्ट-बनाम-होस्ट बीमारी/graft-versus-host disease का ख़तरा है जिसमें डोनर के सेल से उत्पन्न HUYE नई प्रतिरक्षा सेल होस्ट सेल पर हमला करते हैं।

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