ओवेरियन कैंसर (अंडाशय कैंसर) का इलाज | Ovarian Cancer Treatment in Hindi

ओवेरियन कैंसर (अंडाशय कैंसर) का इलाज| Ovarian Cancer Treatment in Hindi

अगर किसी को ओवेरियन कैंसर होने के कोई संकेत या लक्षण दिखाई दें, तो रोग की पहचान के लिए कुछ जांच की जानी ज़रूरी हैं और इससे रोग की स्टेज जानकार इसका उचित इलाज किया जा सकता है। ओवेरियन कैंसर का इलान ओवेरियन कैंसर के प्रकार, रोग की स्टेज, रोगी की स्थिति, और अन्य कारकों पर निर्भर करता है।

चित्रों द्वारा समझाया गया ओवेरियन कैंसर का इलाज | Treatment of Ovarian Cancer explained with Images

अब, हम ओवेरियन कैंसर (ovary cancer) की बात करेंगे।

सर्जरी ओर किमोथेरेपी को ओवेरियन कैंसर के सबसे बेहतर इलाज साधन माना जाता है।

सबसे पहले, हमें यह पता करना होगा कि क्या रोगी को प्रजनन संरक्षण सर्जरी (fertility preservation surgery) दी जा सकती है जिसमें केवल एक तरफ अंडाशय को हटा दिया जाता है, और गर्भाशय के पीछे दूसरे हिस्से को छोड़ दिया जाता है।

यह शूरवाती स्टेज एपिथीलीयल अंडाशय ट्यूमर (epithelial ovary tumors) और सेक्स कॉर्ड-स्ट्रोमल ट्यूमर(sex cord-stromal tumors) में एक विकल्प है जब ट्यूमर एक अंडाशय तक सीमित होता है। और कम ग्रेड या बॉर्डरलाइन अंडाशय के ट्यूमर और अंडाशय के जर्म सेल ट्यूमर के अधिकांश मामलों में अपनाया जाता है।

सबसे पहले, हमें रोगी से पूछना होगा कि उसका परिवार पूरा है या वह भविष्य में बच्चे चाहती है। अगर वह भविष्य में बच्चे चाहती है और यह करना चाहेगी, तो प्रजनन संरक्षण सर्जरी की जा सकती है। लेकिन अंतिम निर्णय रोगी की बीमारी का ठीक से मूल्यांकन करने के बाद ऑन्कोलॉजिस्ट द्वारा लिया जाता है। अब, आगे के इलाज पर चर्चा करते हैं।

ज्यादातर मामलों में, जो सर्जरी हम अंडाशय के ट्यूमर के लिए करते हैं, उसे साइटेडेक्टिव सर्जरी (cytoreductive surgery) कहा जाता है।

इसे प्राथमिक साइटोर्डेक्टिव सर्जरी (primary cytoreductive surgery) या इंटरवल डिबल्किंग सर्जरी (interval debulking surgery) कहा जा सकता है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम कीमोथेरेपी को सर्जरी से पहले या बाद में दे रहे हैं। अगर सर्जरी तब की जाए जब रोगी के पहले इलाज के पूरा होने के बाद बीमारी रेलैप्स हो गई हो, तो इसे द्वितीयक साइटोर्डेक्टिव सर्जरी (secondary cytoreductive surgery) कहा जाता है।

अगर स्कैन में लगता है कि रोग को निकाला जा सकता है, और ऑन्कोलॉजिस्ट द्वारा मूल्यांकन के अनुसार रोगी की स्थिति अच्छी है, तो हम सीधे सर्जरी के लिए आगे बढ़ सकते हैं।

जब कीमोथेरेपी से पहले सर्जरी की जाती है, तो इसे प्राथमिक साइटेडेक्टिव (cytoreductive) सर्जरी कहा जाता है।

कभी-कभी, बीमारी को निकाला नहीं जा सकता, या रोगी की स्थिति खराब होती है। इन दोनों स्थितियों में, सर्जरी संभव नहीं हो सकती। इन मामलों में, इंटरवल डिबल्किंग सर्जरी को प्राथमिकता दी जाती है जिसमें कीमोथेरेपी पहले दी जाती है, और फिर कीमोथेरेपी की प्रतिक्रिया के आधार पर सर्जरी का फ़ैसला किया जाता है।

प्राथमिक कीमोथेक्टिव सर्जरी के बाद क्या सभी मामलों में कीमोथेरेपी ज़रूरी नहीं होती है I यह ट्यूमर की स्टेज और उपप्रकार पर निर्भर करता है। कुछ शुरूवाती स्टेजों और छोटे-ग्रेड के ट्यूमर में, सर्जरी के बाद कीमोथेरेपी की ज़रूरत होती है।

ओवेरियन कैंसर की विभिन्न स्टेजों के लिए प्राथमिक इलाज | Treatment for Different Stages of Ovarian Cancer in Hindi

स्टेज I (Stage I)

स्टेज I एपिथेलियल ओवेरियन कैंसर (epithelial ovarian cancer) के मामले में, साइटोर्डेक्टिव (cytoreductive) सर्जरी को पहले देना बेहतर माना जाता है। स्टेज (IA/IB/IC), ग्रेड और अन्य कारकों के आधार पर सर्जरी के बाद कीमोथेरेपी को जोड़ा जा सकता है।

स्टेज II (Stage II)

स्टेज II एपिथेलियल ओवेरियन कैंसर (epithelial ovarian cancer) के मामले में, साइटोर्डेक्टिव (cytoreductive) सर्जरी के ज्यादातर मामलों में पहले कीमोथेरेपी दी जा सकती है।

स्टेज III (Stage III)

स्टेज III एपिथेलियल ओवेरियन कैंसर (epithelial ovarian cancer) के मामले में, साइटोर्डेक्टिव (cytoreductive) सर्जरी से पहले कीमोथेरेपी दी जा सकती है। अगर रोगी की स्थिति खराब है या रोग पहले निकाला नहीं जा सकता, तो कीमोथेरेपी सर्जरी से पहले दी जा सकती है, वर्ना इसे सर्जरी के बाद दिया जाता है।

स्टेज IV (Stage IV)

स्टेज IV एपिथेलियल ओवेरियन कैंसर (epithelial ovarian cancer) के मामले में, कीमोथेरेपी को प्राथमिक इलाज माना जाता है। प्रतिक्रिया के आधार पर कीमोथेरेपी के बाद सर्जरी भी दी जा सकती है। अन्य पैलिएटिव ट्रीटमेंट का उपयोग बड़ी स्टेज के रोग के लक्षणों को राहत के लिए किया जा सकता है

ओवेरियन कैंसर के विभिन्न इलाज विकल्पों की जानकारी | Overview of Treatment options for Ovarian Cancer in Hindi

अन्य कैंसर के प्रकारों की तरह, ओवेरियन कैंसर एक विषम बीमारी है, मतलब, बिल्कुल अलग आनुवंशिक असामान्यता वाली कई अलग-अलग हिस्टोलॉजी अलग-अलग रोगियों में मौजूद होती है और अलग-अलग स्थानों पर एक व्यक्तिगत रोगी के अंदर मौजूद होती है। इसीलिए एकल रासायनिक उपप्रकार के लिए उपयोगी एजेंट से ओवेरियन कैंसर का इलाज करना बहुत मुश्किल है।

प्राथमिक चिकित्सा की विफलता का एक और कारण है कि समय के साथ ओवेरियन कैंसर सेल में प्रतिरोध का विकास हो जाता है। इसीलिए, रोग का बेहतर नियंत्रण हासिल करने के लिए आमतौर पर कीमोथैरेप्यूटिक एजेंटों को अन्य इलाजों के साथ जोड़ा जाता है।

सर्जरी (Surgery)

सर्जरी (Surgery)

 

ओवेरियन कैंसर के लिए सर्जरी सबसे बेहतर इलाज है। ओवेरियन कैंसर में सर्जरी के मुख्य रूप से 2 उद्देश्य होते हैं: पहला है बीमारी को कम(स्टेज) करना और दूसरा है अधिकतम कैंसर टिशू को हटाना (इसे डिबल्किंग भी कहा जाता है)। स्टेजिंग के लिए, सर्जरी के दौरान निकाले गए टिश्यु की प्रयोगशाला में अच्छी तरह जाँच की जाती है।

इससे सटीक स्टेज पता चलने में मदद मिलती है और इससे बीमारी के लिए एक सही दृतीयक इलाज भी चुने जाते हैं। ज्यादातर रोगियों के लिए, ओवेरियन कैंसर की सर्जरी में अंडाशय और फैलोपियन ट्यूब (सलपिंगो-ओओफोरेक्टॉमी/salpingo-oophorectomy या BSO) दोनों के साथ-साथ गर्भाशय (हिस्टेरेक्टॉमी/hysterectomy) को निकालना शामिल होता है। रोग की सीमा के आधार पर, ओमेंटम/omentum (पेट के अंगों को ढंकने वाली फैटी टिश्यु की परत) को प्रभावित लिम्फ नोड्स और/या जहां रोग होने का सबसे ज़्यादा संदेह हो उन जगहों के साथ (ओमेन्क्टॉमी) भी हटाया जा सकता है।

पेरिटोनियल वIशिंग (peritoneal washings) के साथ पेल्विस या पेट गुहा में मौजूद कोई तरल पदार्थ को भी जाँच के लिए इकट्ठा किया जाता है। अगर पेट में कोई स्थूल रोग नहीं दिखाई दे रहा है तो कुछ जगहों से ब्लाइंड बायोप्सी की जा सकती है। एक अंडाशय/फैलोपियन ट्यूब तक सीमित बीमारी वाले युवा रोगी के लिए और जिसे प्रजनन क्षमता बचानी हो, उसे आमतौर पर प्रजनन संरक्षण सर्जरी (इसमें प्रभावित अंडाशय/फैलोपियन ट्यूब को हटाने और गर्भाशय और अन्य अंडाशय/फैलोपियन ट्यूब को निकालना शामिल है] [एकतरफा salpingo-oophorectomy] USO]) दी जाती है।

कीमोथेरेपी (Chemotherapy)

कीमोथेरेपी (Chemotherapy)

 

कीमोथेरेपी कैंसर विरोधी दवा से किया जाने वाला इलाज है जिससे तेज़ी से बढ़ने वाले कैंसर सेल को मारा या कम किया जाता है। इसे बड़ी स्टेज की बीमारी के इलाज के लिए बेहतर माना जाता है, जब बीमारी दूर के शरीर के अंगों में फैल जाती है। चिकित्सक की राय और रोगी की स्थिति के आधार पर, लाभ में तेजी लाने के लिए इसे अन्य इलाज विकल्पों के साथ जोड़ा जा सकता है।

कभी-कभी, इंट्रापेरिटोनियल(intraperitoneal) कीमोथेरेपी सीधे प्रभावित टिश्यु में कैंसर-विरोधी दवा भेजने के लिए किया जाता है, जो आम दुष्प्रभावों को कम कर सकता है। कीमोथेरेपी का इस्तेमाल नवसहायक/neoadjuvant (सर्जरी से पहले), सहायक (सर्जरी के बाद) और पैलिएटिव (मेटास्टेटिक रोग) सेटिंग्स में किया जा सकता है। इसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं जैसे जी-मचलाना/उलटी, बाल झड़ना, थकान, सेल की कमी, आदि। यह इसीलिए है क्योंकि यह इलाज कैंसर सेल के अलावा सामान्य सेल पर भी अपना असर छोड़ता है।

टार्गेटेड थेरेपी (Targeted Therapy)

टार्गेटेड थेरेपी (Targeted Therapy)

 

टार्गेटेड दवाओं को ओवेरियन कैंसर सेल के विशिष्ट जीन या प्रोटीन को देखकर बनाया जाता है। नैदानिक तकनीकों में प्रगति के साथ, ओवेरियन कैंसर की आनुवंशिक असामान्यताएं सामने आईं हैं जिन्हें टार्गेटेड दवाओं की मदद से ठीक किया जा सकता है। आनुवंशिक असामान्यता की जाँच के लिए टार्गेटेड थेरेपी शुरू करने से पहले आणविक जाँच करना ज़रूरी है।

बड़ी स्टेज वाले ओवेरियन कैंसर के इलाज के लिए विभिन्न टार्गेटेड एजेंटों को स्वीकृत किया गया है। निम्नलिखित टार्गेटेड दवाओं को ओवेरियन कैंसर के इलाज के लिए स्वीकृत किया गया है:

बेवसिज़ुमाब (Bevacizumab)

बेवसिज़ुमाब (Bevacizumab)

 

यह मोनोक्लोनल एंटीबॉडी है जो वैस्क्युलर एंडोथेलियल ग्रोथ फैक्टर (VEGF)-रेसेप्टर (VEGFR) को रोकता है। यह एक कारक है जो एंजियोजिनेसिस (angiogenesis) को बढ़ावा देता है (नई रक्त वाहिकाओं का निर्माण करता है)। बेवसिज़ुमाब (Bevacizumab) को ज़्यादा प्रभावी माना गया है जब दोनों मौजूदा ट्यूमर को सिकोड़ने और पहले से इलाज किए गए ओवेरियन कैंसर को दुबारा होने से रोकने के लिए कीमोथेरेपी के साथ जोडा जाता है। बेवसिज़ुमाब के दुष्प्रभावों में उच्च रक्तचाप, थकान, चोट या रक्तस्राव, मुंह के छाले, भूख में कमी और दस्त शामिल हैं। अन्य बहुत कम होने वाले लेकिन संभवतः गंभीर दुष्प्रभावों में बहुत ज़्यादा रक्तस्राव, रक्त के थक्के, जठरांत्र संबंधी छिद्र और धीमी गति से घाव भरना शामिल हैं।

पैजोपानिब (Pazopanib)

पैजोपानिब (Pazopanib)

 

यह टाइरोसिन केनेज (tyrosine kinases) अवरोधक है जिसमें बहुत सारे कारक शामिल हैं जो VEGFR, प्लेटलेट-डिराइव्ड ग्रोथ फ़ैक्टर रिसेप्टर (PDGFR), फाइब्रोब्लास्ट ग्रोथ फैक्टर रिसेप्टर (FGFR), और c-किट सहित ओवेरियन कैंसर सेल के विकास और फैलाव के लिए जिम्मेदार कई कारकों को रोकता है। यह कॉलोनी उत्तेजक कारक 1, लिम्फोसाइट-विशिष्ट टायरोसिन केनेज और इंटरलेयुकिन (IL)-2-इंड्यूसबल T-सेल केनेज जैसे अन्य कारकों को भी रोकता है।

ओलापरीब (Olaparib)

ओलापरीब (Olaparib)

यह एक पॉली (एडेनोसिन डिपोस्फेट [ADP]-रिबोस) पोलीमरेज़ (PARP) अवरोधक है। PARPs ऐसे एंजाइम होते हैं जो आम तौर पर सेल के अंदर समरूप पुनर्संयोजन (homologous recombination) द्वारा क्षतिग्रस्त DNA की मरम्मत करते हैं। PARP के अवरोध से एकल-स्ट्रैंड DNA का ढेर टूट जाता है, जिससे ठीक न होने पर सेल मर जातें हैं। इस तरह के दोषों को सजातीय पुनर्संयोजन (homologous recombination) के द्वारा BRCA प्रोटीनों के जरिए ठीक किया जा सकता है, जो एक बहुत कुशल प्रक्रिया है। लेकिन, दोषपूर्ण BRCA जीन के म्यूटेशन के साथ सेल ऐसे दोषों को ठीक नहीं कर पाते हैं और मर जाते हैं। इसीलिए, BRCA1/2 म्यूटेशन (लगभग 10% से 20% आँकड़े सभी मामलों में) वाले ट्यूमर, विशेष रूप से PARP अवरोध के प्रति संवेदनशील हैं।

Olaparib (ओलापरीब) को आमतौर पर बड़े, BRCA म्यूटेशन पॉजिटिव, दोबारा होने वाले ओवेरियन कैंसर (प्लैटिनम संवेदनशील या प्रतिरोधी दोनों) वाले रोगियों के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिन्हें कीमोथेरेपी की >/=3 लाइनें मिली हैं।

रकपरिब (Rucaparib) और निरपरिब (Niraparib) अन्य PARP अवरोधक हैं जिनका इस्तेमाल ओवेरियन कैंसर में किया जा सकता है।

PARP अवरोधकों के साथ मतली, उल्टी, थकान, खून की कमी, भूख ना लगना, दस्त, स्वाद में बदलाव, और पेट, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द जैसे दुष्प्रभाव शामिल हो सकते हैं।

इम्यूनोथेरेपी (Immunotherapy)

इम्यूनोथेरेपी (Immunotherapy)

 

पेमब्रोलाइज़ुमैब (Pembrolizumab) एक प्रतिरक्षा चेक-पोईंट अवरोधक जिसे ओवेरियन कैंसर के लिए स्वीकृत किया गया है। इसे ना निकाला जाने वाला/मेटास्टैटिक, माइक्रोसैटेलाइट अस्थिरता-उच्च(MSI-H) या मिस्मैच रीपेयर डेफ़िशीएंट (dMMR) ओवेरियन कैंसर के इलाज के लिए दृतीयक या उसके बाद की थेरेपी के रूप में बड़ी स्टेज के ओवेरियन कैंसर के इलाज के लिए स्वीकृत किया गया है। यह उस स्थिति में है जब ओवेरियन कैंसर पहले के इलाज से ज़्यादा बढ़ चुका है और जिसके लिए कोई और संतोषजनक वैकल्पिक इलाज विकल्प उपलब्ध नहीं है।

MSI-H ओवेरियन कैंसर के लगभग सभी मामलों में 2% के आँकड़े देखे जाते हैं, जो ओवेरियन कैंसर के इलाज में इम्यूनोथेरेपी के सीमित इस्तेमाल का संकेत देते हैं। ओवेरियन कैंसर के इलाज के लिए VEGF इनहिबिटर, PARP इनहिबिटर और अन्य इम्यूनोथेरेपी एजेंटों के साथ अब विभिन्न इम्यूनोथेरेप्यूटिक एजेंट्स की जाँच की जा रही है।

हार्मोनल थेरेपी (Hormonal Therapy)

हार्मोनल थेरेपी (Hormonal Therapy)

 

हार्मोनल कैंसर थेरेपी में दवाओं के साथ इलाज होता है जो कुछ हार्मोन की गतिविधि को नियंत्रित करतीं हैं जिससे कैंसर सेल के विकास को बढ़ावा मिल रहा होता है। आमतौर पर ओवेरियन कैंसर के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली हार्मोनल दवाओं में टेमोक्सीफेन(tamoxifen), एरोमाटेज़(aromatase) इनहिबिटर्स (एनास्ट्रोज़ोल/anastrozole और लेट्रोज़ोल/letrozole), ल्यूप्रोलाइड एसीटेट(leuprolide acetate), या अन्य के बीच मेस्ट्रोल एसीटेट(megestrol acetate) शामिल हैं। हार्मोनल दवाएँ उन रोगियों को दी जा सकतीं हैं जो साइटोटोक्सिक केमोथेराप्यूटिक एजेंटों(cytotoxic chemotherapeutic agents) को सहन नहीं कर सकते या इससे उन्हें दुष्प्रभाव होते हैं।

इन दवाओं को आमतौर पर साइटेडेक्टिव सर्जरी के बाद या सहायक (पोस्ट-सर्जरी) कीमोथेरेपी के बाद उच्च CA-125 (ओवेरियन कैंसर की प्रगति के लिए एक बायोमार्कर) के रोगियों के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाता है। रोग दुबारा से होने के बाद हार्मोनल दवाओं को भी दिया किया जा सकता है।

पैलिएटिव ट्रीटमेंट (Palliative Treatment)

इससे ओवेरियन कैंसर के लक्षणों में राहत देकर ज़िन्दगी की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिल सकती है। उन्हें बड़ी स्टेज के कैंसर में सहायक देख-भाल के लिए दिया जाता है। इसमें दवाएं शामिल हैं जिससे दर्द और लक्षणों को कम किया जा सकता है जैसे उल्टी, थकान या खून बहने या दर्द आदि के लिए एक्सटर्नल-बीम रेडिएशन थेरेपी दी जा सकती है। इसके और भी कई तरह के उपयोग हो सकते हैं।

इलाज का फैसला करने से पहले हर इलाज की लाभ और हानि और बाद में होने वाली दिक्कतों को समझना बहुत ज़रूरी है। कभी-कभी मरीज़ की पसंद और सेहत भी इलाज को चुनने में बहुत महत्त्वपूर्ण होते हैं।

 

ओवेरियन कैंसर के इलाज के बुनियादी लक्ष्य निम्नलिखित हैं:

ज़िन्दगी लम्बी करना।

लक्षणों को काम करना।

ज़िन्दगी की गुणवत्ता में सुधार लाना।

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